Friday, August 21, 2026
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Rajnandgaon Overbridge Crack: राजनांदगांव के बरगा में जून में खुले ओवरब्रिज में आई दरारें, दो हिस्सों में बंटता दिख रहा पुल

Rajnandgaon Overbridge Crack: राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरगा के समीप दक्षिण पूर्व रेलवे द्वारा लगभग 26 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित नया ओवरब्रिज पहली ही मानसूनी बारिश में दरकने लगा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ओवरब्रिज का आधिकारिक उद्घाटन इसी साल जून के महीने में हुआ था। उद्घाटन के महज कुछ सप्ताह बाद ही पुल के मुख्य ढांचे में बड़ी और गहरी दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बीच से दो हिस्सों में बंटता दिख रहा पुल, हादसे की आशंका

बरगा और आसपास के क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों के लिए यह ओवरब्रिज आवागमन का मुख्य और एकमात्र सुगम मार्ग है। ऐसे में पुल के बीचों-बीच आई इन भयानक दरारों ने राहगीरों और वाहन चालकों की चिंता को बेहद बढ़ा दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ओवरब्रिज ऊपर से देखने पर ऐसा लग रहा है मानो बीच से दो हिस्सों में बंट रहा हो, जिससे किसी भी वक्त बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बावजूद निर्माण कार्य में तय मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण पहली ही बरसात में ओवरब्रिज की यह दुर्दशा हो गई है। आक्रोशित जनता ने पुल की तुरंत उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने और दोषी एजेंसी व अधिकारियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की मांग की है।

आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज की भी हालत खराब, धंस रही सड़कें

अनियमितता और बदहाली का यह आलम सिर्फ बरगा तक सीमित नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है। वहाँ कुछ मुख्य स्थानों पर सड़क के नीचे बड़े-बड़े गड्ढे बनने लगे हैं और पुल के किनारों का हिस्सा नीचे की तरफ धंस गया है। ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि जब पहली ही बरसात में यह हाल है, तो आने वाले भारी मानसून के समय यह पुल कैसे टिक पाएगा? इस बदहाली को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है और उन्होंने निर्माण एजेंसी के साथ-साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। फिलहाल स्थिति को बिगड़ता देख रेलवे और संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा प्रभावित हिस्सों पर आनन-फानन में पैचवर्क और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है।

जांच का भरोसा: रेलवे इंजीनियर ने कहा— मामूली सेटलमेंट है

इस पूरे गंभीर मामले पर जब रेलवे के जिम्मेदार इंजीनियरों से बात की गई, तो उनका रुख थोड़ा अलग नजर आया। रेलवे इंजीनियर का कहना है कि पुल में दरार आने के वास्तविक कारणों की पूरी तकनीकी जांच कराई जाएगी, लेकिन फिलहाल खतरे जैसी कोई बात नहीं है। उनका तर्क है कि जब कोई भी नया निर्माण होता है, तो पहली बारिश के दौरान जमीन में थोड़ा-बहुत ‘सेटलमेंट’ (बैठना) होता है, जो कि एक बेहद सामान्य (माइनर) प्रक्रिया है। इसके बावजूद, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए टेक्निकल टीम और उच्च अधिकारियों को निरीक्षण के लिए निर्देशित किया गया है और उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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