Janpad Panchayat Lailunga: गौरी शंकर गुप्ता/लैलूंगा (रायगढ़): छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले जनपद पंचायत लैलूंगा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गति और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विकासखंड की अनेक पंचायतों में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे ग्राम सचिवों की मनमानी, कार्य के प्रति घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं (भ्रष्टाचार) की शिकायतों को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस गंभीर जनसमस्या को देखते हुए स्थानीय ग्रामीण नेता रवि भगत (लैलूंगा) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने जनपद पंचायत लैलूंगा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से पूरे विकासखंड में पदस्थ ऐसे सभी ग्राम सचिवों का तत्काल प्रभाव से सामूहिक स्थानांतरण किए जाने की पुरजोर मांग की गई है।
छोटे-छोटे कामों के लिए चक्कर काट रहे ग्रामीण, लग रहे लापरवाही के आरोप
जनपद सीईओ को सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विकासखंड के अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में कुछ सचिव पिछले कई वर्षों से लगातार अंगद के पैर की तरह एक ही जगह जमे हुए हैं। लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण इन सचिवों में कार्य के प्रति जवाबदेही खत्म हो गई है और वे अपनी मनमानी पर उतारू हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अपने बुनियादी और छोटे-छोटे शासकीय कार्यों (जैसे प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, और पेंशन आदि) के लिए भी पंचायत कार्यालय के चक्कर काटने को विवश होना पड़ रहा है। सचिवों की इस घोर लापरवाही का सीधा और नकारात्मक असर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास कार्यों के जमीनी क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।
पूर्व सरपंचों का प्रभाव और नव-निर्वाचित सरपंचों की राह में रोड़ा
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार, वर्षों से एक ही स्थान पर टिके होने के कारण इन सचिवों का पूर्व सरपंचों और स्थानीय रसूखदारों के साथ एक अनैतिक गठजोड़ बन गया है। ये सचिव आज भी उन्हीं पूर्व जन-प्रतिनिधियों के प्रभाव और इशारों में काम कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, हालिया चुनावों में चुनकर आए नव-निर्वाचित सरपंचों को पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था को समझने और स्वतंत्र रूप से नए विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार कर उन्हें संचालित करने में भारी बाधाओं और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल पंचायतों की आंतरिक व्यवस्था चरमरा गई है, बल्कि पूरे स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
पारदर्शिता की बहाली और आंदोलन की खुली चेतावनी
ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि नौकरशाही और पंचायती राज व्यवस्था में प्रशासनिक पारदर्शिता व निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय-समय पर स्थानांतरण होना अत्यंत आवश्यक है। एक ही स्थान पर अत्यधिक समय तक जमे रहने से न केवल पारदर्शिता धूमिल होती है, बल्कि भ्रष्टाचार और गबन की आशंकाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे में, जवाबदेह व्यवस्था की स्थापना के लिए सभी ग्राम सचिवों का एक ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में अविलंब तबादला किया जाना जनहित में बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों ने दो टूक लहजे में स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर विषय पर तत्परता दिखाते हुए शीघ्र ही कोई ठोस और सुधारात्मक विधिक निर्णय नहीं लिया गया, तो क्षेत्र के ग्रामीण और नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधि मिलकर एक व्यापक व उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्थानीय शासन-प्रशासन की होगी।







