CG NEWS : गौरीशंकर गुप्ता /घरघोड़ा : रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र में जंगल की अवैध कटाई रोकने गए वन विभाग के डिप्टी रेंजर और गार्ड पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला हुआ। हमलावरों ने वर्दी वालों को देखते ही हथियार चला दिए, लेकिन कर्मचारियों ने जान बचाने के लिए भागकर पुलिस थाने पहुंच गए।
CG NEWS : रात करीब 10 बजे घरघोड़ा के निकट बरबसरा जंगल में मुखबिर की सूचना पर डिप्टी रेंजर रामेश पटेल और फॉरेस्ट गार्ड संजय यादव पैट्रोलिंग के लिए पहुंचे। जंगल में सागौन के पेड़ काट रहे तीन-चार लकड़ी तस्करों को रंगे हाथों पकड़ लिया। तस्करों ने पहले बहस की, फिर पास पड़ी कुल्हाड़ियों से हमला बोल दिया। डिप्टी रेंजर के हाथ और कंधे पर गहरी चोटें आईं, जबकि गार्ड को सिर में चोट लगी।
CG NEWS : कर्मचारियों ने हथियारों का जवाब नहीं दिया और जंगल से भागे। रास्ते में ग्रामीणों की मदद से वे घरघोड़ा थाने पहुंचे। प्रारंभिक इलाज के बाद दोनों को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।
CG NEWS : पुलिस ने प्रारंभिक पूछताछ में दो मुख्य आरोपी रामू कोल और भुनेश्वर सिद्धार को नामित किया। दोनों स्थानीय लकड़ी माफिया से जुड़े हैं। एक आरोपी फरार है, जबकि दो को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई। जंगल से बरामद कुल्हाड़ियां और कटे सागौन के तने सबूत के तौर पर जब्त किए गए।
CG NEWS : घरघोड़ा थाने में IPC धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (सरकारी कार्य में बाधा), 506 (धमकी) और वन संरक्षण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई। एसपी अभिषेक मीणा ने विशेष टीम गठित कर 24 घंटे में बाकी आरोपी गिरफ्तार करने का ऐलान किया। वन विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित किया।
CG NEWS : घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में हालिया महीनों में लकड़ी तस्करी के कई मामले पकड़े गए हैं। डिप्टी रेंजर ने बताया कि तस्कर अब हथियारों से लैस होकर आते हैं। वन अमले ने गश्त बढ़ाने और हथियार लाइसेंस की मांग उठाई। स्थानीय लोगों ने हमले की निंदा करते हुए तस्करी रोकने का समर्थन किया।
CG NEWS : रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ का वन संपदा से भरपूर क्षेत्र है, लेकिन कोयला खनन और तस्करी से जंगल खतरे में हैं। घरघोड़ा में सागौन की अवैध कटाई से करोड़ों का खेल चल रहा। पिछले साल इसी इलाके में डिप्टी रेंजर की हत्या का मामला सुर्खियां बटोर चुका।
CG NEWS : यह घटना वनकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। विभाग को ड्रोन निगरानी और हेलमेट-शील्ड जैसे उपकरण देने होंगे। तस्करी रोकने के लिए अंतरराज्यीय सहयोग जरूरी। सफल जांच से अन्य जिलों को साहस मिलेगा।











