Bilaspur Housing Board: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नेहरू नगर में हाउसिंग बोर्ड की बेशकीमती जमीन को कब्जा करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ सिटी मजिस्ट्रेट के एक गलत आदेश के आधार पर सरकारी सामुदायिक भवन में तोड़फोड़ कर दी गई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर अवनीश शरण ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने तोड़फोड़ से बोर्ड को हुए अस्सी लाख रुपये के भारी नुकसान की भरपाई दोषियों से करने का कड़ा आदेश जारी किया है। कमिश्नर ने इस संबंध में बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल को आवश्यक कार्रवाई के लिए एक विस्तृत पत्र लिखा है।
राजस्व अधिकारियों की संलिप्तता की होगी जांच
कमिश्नर ने मामले की तह तक जाने के लिए कलेक्टर को पंद्रह बिंदु तय करके दिए हैं। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की संलिप्तता की भूमिका की निष्पक्ष जांच करने के लिए कहा है। इसके अलावा हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर ने बिलासपुर कलेक्टर के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग, राजस्व मंत्रालय और आवास एवं पर्यावरण विभाग को भी जरूरी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है। पत्र में साफ आरोप लगाया गया है कि इन स्थानीय राजस्व अधिकारियों ने मूल मालिक छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को बिना कोई नोटिस दिए और उसका पक्ष सुने बिना ही एकतरफा आदेश जारी कर दिया था।
फर्जी दस्तावेज के आधार पर ढहाया भवन
इसी विवादित आदेश के आधार पर दो जून को कुदुदंड निवासी मोहम्मद अली के कथित संरक्षण में कुछ लोगों ने साठ साल पुराने सरकारी सामुदायिक भवन को अचानक तोड़ना शुरू कर दिया था। कमिश्नर के अनुसार साल उन्नीस सौ छियासठ में चौदह दशमलव पचपन एकड़ जमीन सहकारी समिति से बकायदा खरीदी गई थी। इसके साथ ही आठ दशमलव इकतीस एकड़ जमीन शासन से अधिग्रहित की गई थी। यही कारण है कि यह पूरी जमीन विभाग के नाम पर दर्ज है। हालांकि स्पष्ट दस्तावेजों के अभाव में भी भू-माफिया के पक्ष में भ्रामक रिपोर्ट तैयार की गई और बिना मालिकाना हक जांचे भवन को तोड़ने का आदेश दे दिया गया।
हस्तक्षेप के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने लगाया स्टे
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के कड़े हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन ने भी तुरंत कदम उठाए हैं। इसके विपरीत स्थिति को बिगड़ता देख सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत ने अपने पूर्व में दिए गए आदेश पर दो जून को ही तत्काल स्थगन यानी स्टे लगा दिया। इसके परिणामस्वरूप वहां चल रही तोड़फोड़ को बीच में ही रोक दिया गया। हाउसिंग बोर्ड की लिखित शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। अंततः मानसेवी गृह निर्माण समिति और हाउसिंग बोर्ड को एक ही संस्था बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने की मांग तेज हो गई है।









