नई दिल्ली : भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक तल्खी अब खत्म होती नजर आ रही है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आगामी मार्च महीने के पहले सप्ताह में भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ सकते हैं। इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। भारत में कनाडा के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने इस यात्रा को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि ऊर्जा, परमाणु सहयोग, खनिज और आधुनिक तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े समझौते संभव हैं।
कूटनीतिक रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश
पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत-कनाडा संबंधों में आई खटास के बाद अब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी रिश्तों को संतुलित और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को दोबारा मजबूत करने का अवसर होगी।
2.8 अरब डॉलर का यूरेनियम समझौता संभव
मार्क कार्नी की भारत यात्रा का सबसे अहम एजेंडा 10 वर्षों के लिए 2.8 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता माना जा रहा है। यह डील भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके साथ-साथ तेल और गैस क्षेत्र में भी द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
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तकनीक और शिक्षा में नई साझेदारी
परमाणु ऊर्जा के अलावा भारत और कनाडा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल इनोवेशन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर भी नए समझौतों का खाका तैयार किया जा रहा है, जिससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसर मिल सकें।
CEPA पर बातचीत शुरू होने की उम्मीद
भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर औपचारिक बातचीत मार्च से शुरू हो सकती है। उच्चायुक्त पटनायक के अनुसार, बातचीत शुरू होने के बाद एक साल के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इससे दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का मुक्त प्रवाह आसान होगा।
सुरक्षा मानकों पर सख्त रुख
कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन, जो इस समय भारत दौरे पर हैं, ने साफ किया है कि परमाणु सहयोग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के पूर्ण पालन के साथ ही होगा। दोनों देशों के बीच तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं पर विस्तृत चर्चा जारी है।
वैश्विक दबावों के बीच रणनीतिक कदम
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और अमेरिकी दबावों के बीच कनाडा नए भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है। भारत जैसे स्थिर और उभरते बाजार के साथ सहयोग कनाडा की वैश्विक रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है।









