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जब राष्ट्रपति के कहने पर भी राहुल गांधी ने नहीं पहना असम का ‘गमोसा’, ‘पटका’ बना सियासी मुद्दा

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नई दिल्ली : 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक नए राजनीतिक विवाद में फंस गए हैं। इस बार मामला राष्ट्रपति भवन में आयोजित पारंपरिक ‘ऐट होम’ स्वागत समारोह से जुड़ा है, जहां उन पर नॉर्थ-ईस्ट की सांस्कृतिक परंपरा की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। विवाद का केंद्र यह है कि राहुल गांधी ने कार्यक्रम में असम का पारंपरिक पटका नहीं पहना, जबकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी अतिथियों से इसे धारण करने का आग्रह किया था।

पूर्वोत्तर संस्कृति को समर्पित था समारोह

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष ‘ऐट होम’ कार्यक्रम की थीम इस बार पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, कला और खान-पान पर आधारित थी। अतिथियों का स्वागत एरी सिल्क से बने शॉल यानी पटका से किया गया, जिसे ‘शांति रेशम’ भी कहा जाता है। यह रेशम असम और नॉर्थ-ईस्ट की पारंपरिक वस्त्र विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है।

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BJP ने बताया नॉर्थ-ईस्ट का अपमान

राहुल गांधी द्वारा पटका न पहनने को लेकर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि राष्ट्रपति ने राहुल गांधी को दो बार पटका पहनने की याद दिलाई, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मालवीय ने इसे “पूर्वोत्तर और राष्ट्रपति पद के सम्मान की अनदेखी” करार दिया।

हिमंत बिस्वा सरमा की कड़ी प्रतिक्रिया

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार कांग्रेस की नॉर्थ-ईस्ट के प्रति पुरानी असंवेदनशीलता को दर्शाता है। सरमा ने राहुल गांधी से असम और पूरे पूर्वोत्तर के लोगों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।

भाजपा नेताओं का तीखा हमला

भाजपा नेता शहजाद पुनावाला ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि राहुल गांधी ने न केवल पूर्वोत्तर बल्कि राष्ट्रपति का भी अपमान किया है। वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने भी इस पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी की सोच पर टिप्पणी की।

कांग्रेस का जवाब: राजनीति से प्रेरित विवाद

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने पलटवार किया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे भी उसी कार्यक्रम में पटका पहने नजर नहीं आ रहे थे। खेड़ा ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा अब उनसे भी माफी की मांग करेगी या यह सिर्फ चुनावी राजनीति का हिस्सा है।

चुनावी माहौल में बढ़ा सियासी तापमान

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब असम विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे को सांस्कृतिक सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर दबाव बनाना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे गैर-जरूरी और ध्यान भटकाने वाला मुद्दा बता रही है।

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