Biography of Shashimohan Singh : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा : छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में एक ऐसा नाम जो वर्दी की सख्ती और कला की बारीकियों का अनूठा संगम है, वह है आईपीएस शशिमोहन सिंह। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर की कमान सफलतापूर्वक संभालने के बाद, अब उन्हें राज्य के महत्वपूर्ण औद्योगिक और वीवीआईपी जिले रायगढ़ का एसएसपी नियुक्त किया गया है। दुर्ग के रहने वाले शशिमोहन सिंह का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जहां उन्होंने लेक्चरर से लेकर आईपीएस बनने तक के पड़ाव बड़ी चुनौतियों के साथ पार किए हैं।
1997 में राज्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से डीएसपी बनने वाले शशिमोहन सिंह का करियर होशंगाबाद और इटारसी जैसे स्थानों से शुरू हुआ। एक जवान के बेटे के रूप में पले-बढ़े शशिमोहन की प्रारंभिक शिक्षा बिहार और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग स्कूलों में हुई। गणित विषय में स्नातक करने के बाद उन्होंने हिंदी साहित्य में एमए किया और एक दौर में साजा कॉलेज में तदर्थ लेक्चरर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। यही वजह है कि उनकी पुलिसिंग में भी साहित्य और संवेदनाओं की स्पष्ट छाप नजर आती है।
शशिमोहन सिंह का व्यक्तित्व बहुआयामी है। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने खाकी से ब्रेक लेकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा। 2010 से 2012 के बीच उन्होंने छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी सिनेमा में काम किया। उन्होंने ‘मया देदे मयारु’ और निरहुआ के साथ ‘वर्दी वाला गुंडा’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। उनकी फिल्म ‘भूलन द मेज’ को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। हालांकि, कला के प्रति उनके जुनून के बावजूद उनका पहला प्यार पुलिसिंग ही रहा और उन्होंने फिर से वर्दी पहनकर कानून व्यवस्था का मोर्चा संभाला।![]()
2018 में आईपीएस अवार्ड पाने वाले शशिमोहन सिंह का करियर का बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बीता है। दंतेवाड़ा और जगदलपुर की बटालियनों में लंबे समय तक कमांडेंट के रूप में तैनात रहे। विपरीत परिस्थितियों में काम करने का उनका अनुभव उन्हें एक कुशल रणनीतिकार बनाता है। वे केवल एक पुलिस अफसर ही नहीं, बल्कि एक लेखक और कवि भी हैं। उनकी दो पुस्तकें ‘लहरों के उस पार भी तुम हो’ और ‘अनगढ़ दुनिया गढ़े तराशे’ जल्द ही पाठकों के सामने होंगी।
उनकी कार्यशैली में ‘नवाचार’ (Innovation) सबसे महत्वपूर्ण है। जब सीएम विष्णु देव साय ने उन्हें जशपुर का एसपी बनाया, तो वहां उन्होंने न केवल नशे की सप्लाई चेन को तोड़ा, बल्कि डकैती जैसी घटनाओं पर भी अंकुश लगाया। अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए वे तकनीक और मानवीय संवेदना का मिश्रण इस्तेमाल करते हैं। अपराधियों के लिए वे बेहद सख्त हैं, तो वहीं आम जनता और पीड़ितों के लिए वे सौम्य स्वभाव के माने जाते हैं।
रायगढ़, जो वित्त मंत्री ओपी चौधरी का गृह जिला भी है, वहां अपराध की चुनौतियां जशपुर से अलग और जटिल हैं। औद्योगिक क्षेत्र होने के नाते वहां कानून व्यवस्था की संजीदगी बहुत अधिक है। ऐसे में शशिमोहन सिंह जैसे अनुभवी और शांतचित्त अफसर की तैनाती को सरकार का एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का उन पर अटूट भरोसा यह दर्शाता है कि रायगढ़ की कमान ऐसे हाथों में है जो अपराध को जड़ से मिटाने का दम रखते हैं।
शशिमोहन सिंह का निजी जीवन भी बेहद सादगीपूर्ण है। 1998 में श्रीमती रेखा सिंह से उनका विवाह हुआ और उनका एक बेटा है। एक तरफ पारिवारिक जिम्मेदारियां और दूसरी तरफ प्रदेश के अहम जिले की सुरक्षा का भार, शशिमोहन सिंह इन दोनों के बीच संतुलन बनाने में माहिर हैं। वे थियेटर भी करते हैं, जो उनके व्यक्तित्व में गजब का आत्मविश्वास और संवाद कला विकसित करता है।
रायगढ़ में उनकी नियुक्ति को लेकर न केवल पुलिस विभाग में बल्कि आम जनता में भी उम्मीदें जगी हैं। वे पुलिसिंग के उन पुराने ढर्रों को बदलने के लिए जाने जाते हैं, जो जनता और पुलिस के बीच दूरी पैदा करते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि रील लाइफ में पुलिस अफसर की भूमिका निभाने वाले ये ‘असली’ पुलिस अफसर रायगढ़ की कानून व्यवस्था को किस नई ऊंचाई पर ले जाते हैं।











