बेंगलुरु: बेंगलुरु: एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने बेंगलुरु ट्रैफिक पर ऐसा कमेंट किया कि लोग हंसते-हंसते फूट पड़े। उन्होंने कहा, “सच में, अंतरिक्ष में जाना तो बेंगलुरु की सड़क पार करने से कहीं आसान है।” हाँ, वही आईटी हब जिसकी सड़कें हर रोज लोगों के धैर्य की परीक्षा लेती हैं। शुभांशु ने यह मजेदार कमेंट बेंगलुरु टेक समिट में किया।
34 किलोमीटर की ‘जर्नी ऑफ़ हर्ट’
मराठाहल्ली से बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्ज़िबिशन सेंटर तक 34 किलोमीटर का सफर, जो आमतौर पर 1 घंटे में पूरा होता है, शुभांशु के अनुसार उनके प्रेजेंटेशन से तीन गुना लंबा लगा। मतलब प्रेजेंटेशन तो बस कुछ मिनट का था, लेकिन सड़क पर फंसा टाइम ऐसा कि लगे जैसे लाइफ टाइम जर्नी कर ली हो।
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मंत्री बोले, “हम कर रहे हैं कोशिश”
कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने तुरंत प्रतिक्रिया दी—“सरकार ट्रैफिक कम करने की कोशिश कर रही है।” यानी उम्मीद वही कि अगले 10 साल में शहर की सड़कें शायद उड़ने वाले स्कूटर या रॉकेट से पार हों।
ट्रैफिक की असली तस्वीर
जून 2025 के ट्रैफिक हीटमैप के अनुसार, बेंगलुरु में रोजाना करीब 190 किलोमीटर लंबा जाम लगता है। 19 किलोमीटर का सफर अब लगभग 63 मिनट में तय होता है। सोचो अगर आप 34 किलोमीटर का सफर करो, तो शुभांशु की तरह शायद अगले जन्म में पहुंचे।
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गाड़ियां बढ़ीं, धैर्य घटा
जनवरी से जून 2025 तक शहर में 3 लाख नई गाड़ियां जुड़ी हैं। सिर्फ जून में ही करीब 50,000 नई गाड़ियां रजिस्टर्ड हुई। मतलब, सड़कें अब “वाहन-फुल म्यूज़ियम” बन चुकी हैं और हर यात्री साल में 117 घंटे बस ट्रैफिक में ही फंसा रहता है।











