Air India Flight Crash : मुआवजे के नाम पर कानूनी दबाव? पीड़ित परिवारों का फूटा गुस्सा…पढ़े पूरी खबर

अहमदाबाद। Air India Flight Crash : अहमदाबाद में 12 जून को हुए AI-171 फ्लाइट हादसे के बाद अब मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिवारों ने एअर इंडिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मुआवजा देने की आड़ में कंपनी द्वारा भेजे गए फॉर्म में कानूनी जाल बुना गया है, जिससे भविष्य में उनके दावों को कमजोर किया जा सके।

Air India Flight Crash : परिजनों का आरोप है कि एअर इंडिया ने जो प्रश्नावली भेजी है, उसमें बिना किसी स्पष्ट जानकारी के “आर्थिक निर्भरता”, “उत्तरजीवी लाभार्थी” जैसे कानूनी शब्दों का प्रयोग किया गया है। इससे आशंका जताई जा रही है कि इस तरह की जानकारी भविष्य में परिवारों के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है।

इस बीच, एअर इंडिया ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि सही व्यक्ति तक पहुंचे। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परिवार के घर पर बिना अनुमति दौरा नहीं किया जाएगा, और फॉर्म को ईमेल या व्यक्तिगत रूप से जमा किया जा सकता है।

यूके की लीगल फर्म स्टुअर्ट्स, जो 40 से ज्यादा पीड़ित परिवारों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रही है, ने कहा कि एअर इंडिया भावनात्मक और कानूनी रूप से दबाव डालने की कोशिश कर रही है। स्टुअर्ट्स के पार्टनर पीटर नीनन ने एयरलाइन की आलोचना करते हुए कहा, “यह शर्मनाक है कि संकट में डूबे परिवारों को ऐसे शब्दजाल में उलझाया जा रहा है।”

Air India Flight Crash

हालांकि एअर इंडिया ने दावा किया है कि अब तक 47 परिवारों को अग्रिम भुगतान कर दिया गया है और बाकी 55 के मामले प्रक्रियाधीन हैं। एयरलाइन ने यह भी दोहराया कि परिवारों को अंतिम संस्कार, अस्थायी आवास और पुनर्वास जैसी सेवाओं के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।

गौरतलब है कि हादसे के बाद टाटा समूह ने प्रत्येक मृतक के परिजन को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि और 500 करोड़ रुपये के ट्रस्ट की स्थापना का ऐलान किया था, जिसका उद्देश्य दीर्घकालीन सहायता, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आपदा के बाद मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से की जा रही है, या फिर कंपनियां कानूनी बचाव के लिए पीड़ितों पर मानसिक दबाव बना रही हैं।

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