Fake Fertilizer Alert: बड़वानी में नकली खाद का गंभीर आरोप: जनसुनवाई में कलेक्टर के पास बोरी लेकर पहुंचा किसान

Fake Fertilizer Alert: बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में खरीफ सीजन के ऐन वक्त पर किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले खाद और उन्नत बीज उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब अंचल का एक प्रगतिशील किसान कथित रूप से घटिया और नकली डीएपी (DAP) खाद की बोरी अपने कंधों पर लादकर सीधे कलेक्टर के समक्ष न्याय की गुहार लगाने पहुंच गया।

किसान ने जिला प्रशासन को विधिवत लिखित आवेदन सौंपकर सहकारी समिति के माध्यम से अमानक और संदिग्ध उत्पाद वितरित किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र के कृषक समाज में आक्रोश व्याप्त है।

निर्धारित शासकीय टोकन पर मिली थी खाद, खेतों में नहीं दिखा कोई परिणाम

प्राप्त प्रामाणिक विवरण के अनुसार, इस गंभीर मामले के शिकायतकर्ता की पहचान ग्राम छिवाला, तहसील पाटी निवासी किसान प्रेमसिंह पिता लक्ष्मण के रूप में हुई है। पीड़ित किसान प्रेमसिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मीडिया कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि:

“मैंने चालू खरीफ सीजन में बुआई हेतु शासन द्वारा निर्धारित विहित प्रक्रिया का पूर्ण पालन करते हुए बकायदा टोकन प्राप्त किया था। इसी आधिकारिक टोकन के आधार पर मैंने स्थानीय सहकारी समिति से डीएपी खाद की बोरियां खरीदी थीं। लेकिन जब बोरी खोली गई, तो उसके भीतर मौजूद खाद के दानों की बनावट, रंग और बोरी पर छपी अधूरी जानकारियों को देखकर मुझे इसकी प्रामाणिकता पर गहरा संदेह हुआ।”

किसान ने आगे बताया कि संशय के बावजूद उसने उक्त खाद का कुछ हिस्सा अपने खेतों में उपयोग किया, परंतु फसल में कोई भी अपेक्षित सुधार या सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर नहीं हुआ, जिससे उसे इस वर्ष लागत डूबने और भारी आर्थिक नुकसान होने की पूरी आशंका है।

वैज्ञानिक लैब टेस्टिंग और दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग

कलेक्टर जनसुनवाई के दौरान पीड़ित किसान ने न केवल खाद की भरी बोरी प्रशासनिक टेबल पर लाकर रख दी, बल्कि समिति से प्राप्त क्रय रसीद और टोकन जैसे तमाम आवश्यक दस्तावेज भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए। किसान ने कड़े शब्दों में मांग की है कि कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम के माध्यम से उक्त खाद का तत्काल प्रयोगशाला (लैब) में वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।

यदि वैज्ञानिक जांच में खाद अमानक, मिलावटी या नकली प्रमाणित होती है, तो किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले मुख्य आपूर्तिकर्ता, निर्माता कंपनी, समिति के दोषी विक्रेताओं और संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बड़वानी जिले में व्यापक सैंपलिंग अभियान चलाने की उठी मांग; प्रशासन हुआ मुस्तैद

किसान प्रेमसिंह ने अपने आवेदन के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान एक बड़े संकट की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण समय में यदि ग्रामीण अंचलों में बड़े पैमाने पर ऐसी घटिया या नकली खाद का वितरण होता रहा, तो इससे पूरे जिले के कृषि उत्पादन पर सीधा और अत्यंत नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों की रीढ़ पूरी तरह टूट जाएगी।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी सोसायटियों और निजी केंद्रों में भेजी जा रही खाद की सघन सैंपलिंग की जाए। कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में इस संवेदनशील शिकायत के दर्ज होते ही जिला प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से संज्ञान में लिया है। कलेक्टर ने तत्काल कृषि विभाग के उपसंचालक (DDA) को चिन्हित समिति के खाद स्टॉक को सीज करने और भौतिक जांच रिपोर्ट अविलंब प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

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