निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वनतारा में घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का कोई उल्लंघन नहीं पाया गया है। इस फैसले के साथ ही वनतारा को एक बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।
यह याचिका ‘करणार्थम विरम’ नाम की एक फाउंडेशन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें वनतारा पर पशु कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे।
SIT रिपोर्ट पर कोर्ट की मुहर
सुप्रीम कोर्ट की पीठ—जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया—ने पूर्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट को सही ठहराया।SIT ने 12 सितंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें वनतारा को सभी आरोपों से क्लीन चिट दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला पहले भी विचाराधीन रह चुका है और नई याचिका में कोई नया तथ्य सामने नहीं आया।
CITES नियमों का हुआ पालन
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा जिन अंतरराष्ट्रीय नियमों (CITES) का हवाला दिया गया, वे उनके पक्ष में नहीं हैं।अदालत के अनुसार, जानवरों का आयात सभी आवश्यक परमिट और दस्तावेजों के साथ किया गया था और यह किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए नहीं था। इसलिए इसे अवैध नहीं माना जा सकता।
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माधुरी हथिनी विवाद भी चर्चा में
वनतारा को लेकर चर्चा तब तेज हुई थी, जब ‘माधुरी’ नाम की हथिनी को कोल्हापुर के जैन मठ से वनतारा शिफ्ट किया गया था।बॉम्बे हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा था। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
नई जांच समिति बनाने से इनकार
याचिका में एक स्वतंत्र राष्ट्रीय समिति गठित करने की मांग भी की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।कोर्ट ने कहा कि जब SIT पहले ही विस्तृत जांच कर चुकी है, तो दोबारा जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
SIT ने किन बिंदुओं पर की जांच
SIT ने जांच के दौरान वन्यजीव संरक्षण कानून, चिड़ियाघर नियम, CITES, आयात-निर्यात कानून, पशु कल्याण, वित्तीय पारदर्शिता और वन्यजीव तस्करी जैसे मुद्दों पर गहराई से जांच की थी।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पहले से निपटाए गए मामलों को दोबारा उठाने का कोई औचित्य नहीं है। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि वनतारा के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पर्याप्त आधार नहीं था और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे क्लीन चिट मिल चुकी है।











