Saurabh Sharma RTO Constable Case : भोपाल (05 मार्च 2026): मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के एक पूर्व मामूली कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा द्वारा बनाई गई अकूत बेनामी संपत्ति पर अब सरकारी मुहर लग गई है। आयकर विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भोपाल स्थित बेनामी निषेध इकाई (BPU) की कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराते हुए करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया है। इसमें 51.8 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये की नकद राशि शामिल है, जो अब सरकारी खजाने में जमा की जाएगी।
जंगल में कार से बरामद हुआ था करोड़ों का सोना यह पूरा मामला दिसंबर 2024 में तब सुर्खियों में आया था, जब लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की संयुक्त जांच के दौरान भोपाल के मेंडोरी जंगलों में एक लावारिस इनोवा कार मिली थी। इस कार की तलाशी लेने पर जांच एजेंसियां दंग रह गई थीं। कार के भीतर से 11 करोड़ रुपये नकद और 51.8 किलो सोना बरामद हुआ था। जांच में पता चला कि यह कार चेतन सिंह गौर के नाम पर दर्ज थी, लेकिन इसका वास्तविक नियंत्रण और स्वामित्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के पास था।
बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत कार्रवाई आयकर विभाग ने इस पूरे मामले को ‘बेनामी लेनदेन’ (Benami Property Act की धारा 2(9)(A)) के तहत दर्ज किया था। अथॉरिटी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि चेतन सिंह गौर केवल एक ‘बेनामीदार’ (मुखौटा) था, जबकि इस संपत्ति का वास्तविक मालिक सौरभ शर्मा ही है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सौरभ शर्मा की 92 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को कुर्क कर चुका है। अब ताजा फैसले के बाद कुल जब्ती का आंकड़ा 100 करोड़ के पार पहुँच गया है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध नजीर बनेगा यह मामला एक सिपाही के पद पर रहते हुए इतनी विशाल संपत्ति अर्जित करना प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब इस सोने और नकदी को राजसात करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेनामी संपत्ति कानून के तहत यह मध्य प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाइयों में से एक है, जो भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।











