caste certificate disput: मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा करने वाले राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे।
दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि मंत्री प्रतिमा बागरी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लाभ प्राप्त किया है। याचिका में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
caste certificate dispute: सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जांच प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार को फटकार लगाई और कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में देरी न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या दोष सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जांच पर किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव न हो।
हाईकोर्ट के इस रुख के बाद राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर अब समयसीमा के भीतर निष्कर्ष तक पहुंचने का दबाव बढ़ गया है। वहीं, इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज कर दी है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है, जबकि सत्तापक्ष के लिए यह एक संवेदनशील राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
caste certificate dispute: अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति तय समय सीमा के भीतर क्या रिपोर्ट पेश करती है और इस विवाद का आगे क्या परिणाम निकलता है।
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