वॉशिंगटन: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका अब और सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यदि कोई देश रूस से तेल की खरीद जारी रखता है, तो उस पर कम से कम 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने अपनी नीति में बदलाव किया है।
भारत पर 25% टैरिफ के बाद बदली नीति?
स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी, लेकिन हाल के महीनों में यह लगभग बंद कर दी गई है। उनके अनुसार, इसकी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ है। बेसेंट ने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि अमेरिका की आर्थिक रणनीति किस तरह देशों को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर कर सकती है।
Read More : एक्शन मोड में BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, की केरल से तेलंगाना तक चुनावी प्रभारियों की नियुक्ति
फॉक्स न्यूज इंटरव्यू में किया बड़ा खुलासा
अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह बयान फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उन देशों पर नजर बनाए हुए है, जो रूस के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखे हुए हैं। बेसेंट के मुताबिक, आने वाले समय में ऐसे देशों के खिलाफ और कड़े आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।
IEPA के तहत बिना सीनेट मंजूरी कार्रवाई संभव
स्कॉट बेसेंट ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस तरह की कार्रवाई के लिए सीनेट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन International Emergency Economic Powers Act (IEPA) का इस्तेमाल कर सीधे टैरिफ और प्रतिबंध लागू कर सकता है। इससे अमेरिका को आर्थिक दबाव बनाने में कानूनी रूप से ज्यादा ताकत मिलती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर पड़ेगा। खासतौर पर विकासशील देशों के लिए यह कदम आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
अमेरिका का सख्त संदेश
स्कॉट बेसेंट के बयान को रूस पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि जो देश रूस के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन्हें भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।









