Bhagirathpura tragedy : इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में ‘जहरीले’ पानी के कारण हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने का मामला अब न्याय के कटघरे में है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले को लेकर जनहित याचिकाओं (PIL) का दौर जारी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नगर निगम ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट, आंकड़ों पर सवाल
हाई कोर्ट के पिछले आदेश के बाद, आज 2 जनवरी को नगर निगम ने अदालत में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। हालांकि, इस रिपोर्ट पर याचिकाकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं:
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मौतों का आंकड़ा: अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत को बताया कि नगर निगम की रिपोर्ट में केवल 4 मौतों का जिक्र है, जबकि हकीकत में यह संख्या कहीं अधिक है।
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तथ्यात्मक रिपोर्ट की मांग: अदालत से मांग की गई है कि नगर निगम एक विस्तृत और पूरी तरह तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करे, जिसमें हर प्रभावित व्यक्ति का विवरण हो।
तीन जनहित याचिकाएं और कोर्ट के निर्देश
इस मामले में अब तक कुल तीन याचिकाएं दायर हो चुकी हैं:
- पहली: बार एसोसिएशन अध्यक्ष रितेश ईनाणी द्वारा।
- दूसरी: पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी द्वारा (पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव)।
- तीसरी: आज दायर की गई नई याचिका, जिस पर कलेक्टर और निगमायुक्त को नोटिस जारी हुए।
अदालत ने 31 दिसंबर को दिए अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया था कि सभी प्रभावितों का इलाज मुफ्त होना चाहिए और स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए।
मुआवजा बढ़ाने की मांग
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली सहायता राशि (मुआवजा) बढ़ाने की भी पुरजोर वकालत की। कोर्ट ने इन सभी पहलुओं पर गौर करते हुए अगली सुनवाई की तारीखें तय कर दी हैं। पहले से दायर दो याचिकाओं पर 6 जनवरी को और नई याचिका पर 19 जनवरी को सुनवाई होगी।











