CG News: दुर्ग में 68 समितियों में 27,900 क्विंटल धान का अंतर! मचा हड़कंप, प्रशासन ने दिया 4 दिन का अल्टीमेटम

Rahul Goshwami

Durg Paddy Scam: दुर्ग धान घोटाला मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जिले की 68 सहकारी समितियों में किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच करीब 27,900 क्विंटल धान का अंतर पाया गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस धान की कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपए बताई जा रही है।इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

दुर्ग धान घोटाला की परतें उस समय खुलीं जब धान खरीदी केंद्रों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में कई समितियों के रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक रूप से उपलब्ध धान की मात्रा में बड़ा अंतर मिला।अधिकारियों का मानना है कि यह केवल रिकॉर्ड संबंधी गलती नहीं हो सकती, बल्कि धान उठाव, भंडारण और परिवहन प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की ओर संकेत करती है।

कलेक्टर ने जारी किया सख्त अल्टीमेटम
दुर्ग धान घोटाला सामने आने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने संबंधित समिति प्रभारियों को चार दिन का समय दिया है। निर्देश दिया गया है कि निर्धारित अवधि के भीतर या तो धान जमा कराया जाए या उसकी समतुल्य राशि जमा की जाए।प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि समय सीमा पूरी होने के बाद नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

धमधा समिति में सबसे ज्यादा कमी
दुर्ग धान घोटाला की जांच में सबसे बड़ी गड़बड़ी धमधा समिति में सामने आई है। यहां 4,646 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई है।इसके अलावा जामगांव आर समिति में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रशासन ने इन मामलों में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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कुछ समितियों ने जमा की राशि
दुर्ग धान घोटाला की जांच के दौरान ननकट्टी समिति के प्रभारी द्वारा कमी की राशि जमा करने की जानकारी भी सामने आई है। इससे संबंधित मामले में स्थिति स्पष्ट हुई है।हालांकि, कई अन्य समितियों के मामलों में अभी जवाबदेही तय की जा रही है।

किसानों के भरोसे पर असर की आशंका
दुर्ग धान घोटाला ऐसे समय सामने आया है जब धान खरीदी प्रणाली प्रदेश के लाखों किसानों की आय से सीधे जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर किसानों के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
दुर्ग धान घोटाला के बाद प्रशासनिक स्तर पर डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित ऑडिट और भौतिक सत्यापन को और प्रभावी बनाने की चर्चा तेज हो गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक आधारित निगरानी से भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

दोषियों पर होगी कार्रवाई
दुर्ग धान घोटाला मामले में प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी स्तर पर जानबूझकर लापरवाही या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पूरे जिले की नजर इस बात पर है कि चार दिन की समय सीमा समाप्त होने तक कितनी समितियां धान या राशि जमा करती हैं और किन मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई होती है।

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