Babar controversy : जबलपुर। देश में बाबर और बाबरी मस्जिद को लेकर चल रही सियासी गहमागहमी अब मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर तक पहुँच गई है। जबलपुर के सार्वजनिक शौचालयों पर विवादित ढंग से ‘बाबर मूत्रालय’ के पोस्टर चिपकाए जाने का मामला सामने आया है। हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने न केवल यह पोस्टर चिपकाए, बल्कि शहर के अन्य शौचालयों पर भी इसी तरह के पोस्टर लगाने का खुला ऐलान किया है। इस घटना से शहर में तनाव की स्थिति बन गई है।
यह विरोध मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाए जाने की घोषणा के खिलाफ जताया गया है। कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर बाबर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह घोषणा पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने की है। हिंदूवादी संगठन इस घोषणा को 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं के खिलाफ बता रहे हैं और उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
Babar controversy : हिंदूवादी नेता विकास खरे ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हुमायूं कबीर का यह फैसला देश की शांति और सद्भाव को बिगाड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद भी इस तरह की घोषणाएं करना अवांछित और भड़काऊ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम बंगाल के निष्कासित विधायक अपने इस बयान से पीछे नहीं हटते हैं और बाबरी मस्जिद बनाने की कोशिश की जाती है, तो हिंदूवादी कार्यकर्ता एक बार फिर कारसेवा करने के लिए मजबूर होंगे।
Babar controversy : पोस्टर चिपकाने और विरोध प्रदर्शन के बाद जबलपुर पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस उन स्थानों पर निगरानी बढ़ा रही है जहाँ इस तरह के विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन इस बात का आकलन कर रहा है कि इस कार्रवाई से सांप्रदायिक सद्भाव पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं को हवा दे दी है। हिंदूवादी संगठनों की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अयोध्या फैसले के बाद भी बाबर से जुड़े किसी भी निर्माण या बयान को लेकर वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। शहर के शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।











