अपने ही सरकार के फैसले के खिलाफ! सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई जमीन गाइडलाइन दरों का किया विरोध, CM साय को लिखा खत

रायपुर: छत्तीसगढ़ में 20/11/2025 को लागू नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों में बड़े पैमाने पर वृद्धि के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जमीन की कीमतें 5 से 9 गुना बढ़ गई हैं, जिसका विरोध अब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विस्तृत पत्र लिखकर इसे तुरंत स्थगित करने और पुनर्विचार करने की मांग की।

सरकार की नीतियों पर सांसद का आरोप
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि गाइडलाइन दरों में भारी वृद्धि बिना जन-परामर्श, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव अध्ययन और वास्तविक मूल्यांकन के की गई। उनके अनुसार यह फैसला किसान, छोटे व्यवसायी, रियल एस्टेट निवेशक और मध्यम वर्ग सभी के लिए “Ease of Living” और “Ease of Doing Business” के खिलाफ है।

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725% और 888% तक की चौंकाने वाली वृद्धि
पत्र में अग्रवाल ने लाभांडी और निमोरा गांवों का उदाहरण देते हुए बताया कि गाइडलाइन दरें क्रमशः 725% और 888% तक बढ़ा दी गई हैं, जबकि बुनियादी सुविधाएं भी विकसित नहीं हैं। नवा रायपुर ग्रामीण क्षेत्र को नगरीय घोषित करना भी विवादास्पद है।

सरकार का दावा और जनता पर असर
सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई दरों से किसानों को अधिक मुआवजा मिलेगा, लेकिन सांसद ने तर्क दिया कि अधिग्रहण के लिए केवल 1% जमीन इस्तेमाल होती है, जबकि 99% जनता को पंजीयन शुल्क और बढ़े हुए मूल्य का भारी बोझ उठाना पड़ता है।

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नई गाइडलाइन में बदलाव और आर्थिक दबाव
पहले 30% छूट के बाद जमीन का मूल्य माना जाता था, अब 100% मूल्य गिना जाएगा, जबकि पंजीयन शुल्क 4% और मकानों पर 2% ही रखा गया है। इससे आम जनता पर दोगुना आर्थिक दबाव पड़ेगा।

सांसद की मांगें

  • नई गाइडलाइन को तत्काल स्थगित किया जाए
  • पुरानी गाइडलाइन पुनः लागू की जाए
  • स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से वास्तविक मूल्यांकन कराया जाए
  • पंजीयन शुल्क 4% से घटाकर 0.8% किया जाए
  • नवा रायपुर ग्रामीण क्षेत्र को पुनः ग्रामीण दर्जा दिया जाए

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि यह राजनीति नहीं, बल्कि जनता की सेवा है। गाइडलाइन दरों की भारी वृद्धि से लाखों परिवार आर्थिक दबाव में आ सकते हैं। प्रशासनिक निर्णयों में यह विफलता सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।

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