Mundwa Land Scam : पुणे जमीन घोटाला की जांच रिपोर्ट में पार्थ पवार क्लीन! सब-रजिस्ट्रार समेत 3 फंसे

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PARTH-AJIT PAWAR
PARTH-AJIT PAWAR

मुंबई : महाराष्ट्र में 300 करोड़ रुपये की विवादित मुंडवा जमीन डील को लेकर आखिरकार जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। सरकारी जमीन को कथित तौर पर निजी कंपनी को बेचने और स्टांप ड्यूटी में बड़ी छूट देने के मामले में संयुक्त IGR की तीन सदस्यीय समिति ने सस्पेंडेड सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू समेत तीन लोगों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। राज्य सरकार ने संबंधित कंपनी को 42 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी की वसूली के लिए नोटिस भी जारी कर दिया है।

जांच में किन पर गिरी गाज?
रिपोर्ट में जिन तीन लोगों को जिम्मेदार माना गया है उनमें—

  • रविंद्र तारू – सब-रजिस्ट्रार (निलंबित)
  • दिग्विजय पाटिल – पार्थ पवार के पार्टनर और रिश्तेदार
  • शीटल तेजवानी – सेलर्स की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक

ये तीनों पहले से पुलिस FIR में आरोपी हैं। रिपोर्ट में एक अहम बात यह भी सामने आई कि पार्थ पवार का नाम किसी दस्तावेज़ में नहीं था, इसलिए उन्हें जांच में दोषी नहीं ठहराया गया।

कैसे बिकी सरकारी जमीन ?
मुंडवा का 40 एकड़ का यह प्राइम लैंड सरकारी स्वामित्व वाला था, जिसकी बिक्री कानूनी रूप से संभव ही नहीं थी। फिर भी इसे अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP के नाम रजिस्टर्ड कर दिया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी को लगभग 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी में गलत छूट दी गई, जो प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।

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जांच समिति की सिफारिशें
समिति ने भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने के लिए कई सुधार सुझाए हैं—

  • स्टांप ड्यूटी की किसी भी छूट के लिए कलेक्टर (स्टांप) की अनुमति अनिवार्य हो।
  • 7/12 एक्सट्रैक्ट एक महीने से ज्यादा पुराना न हो।
  • सरकारी या आंशिक सरकारी स्वामित्व वाली जमीनों के दस्तावेज़ सब-रजिस्ट्रार के स्तर पर रजिस्टर्ड न हों।
  • धुंधली या विवादित स्वामित्व वाली जमीनें भी उसी श्रेणी में शामिल की जाएँ।

कंपनी पर 42 करोड़ की वसूली का नोटिस
IGR कार्यालय ने अमाडिया एंटरप्राइजेज को 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी को लेकर जवाब देने का नोटिस भेजा है। कंपनी ने 15 दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन विभाग ने केवल 7 दिन का समय दिया है।

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अन्य रिपोर्टें भी जल्द
राजस्व विभाग और सेटलमेंट कमिश्नर की रिपोर्टें भी तैयार हो रही हैं। तीनों रिपोर्टें अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खर्गे को भेजी जाएंगी, जो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा गठित छह सदस्यीय समिति के प्रमुख हैं। सरकार पहले ही डील को रद्द कर चुकी है।

 

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