Muktinath Dham : नई दिल्ली। नेपाल के हिमालय की गोद में स्थित मुक्तिनाथ धाम हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए यहां पिंडदान और 108 पवित्र नलों में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।
धरती पर स्वर्ग जैसा अनुभव:
मुक्तिनाथ धाम लगभग 3760 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे भगवान विष्णु का निवास स्थल माना जाता है। यहाँ की यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि प्राकृतिक सुंदरता का भी अद्भुत अनुभव कराती है। कागबेनी गांव से होते हुए हिमालय की घाटियों, नदियों और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच यह यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अहसास कराती है। मार्ग में अन्नपूर्णा और धौलागिरी जैसी चोटियों का दृश्य यात्रा को और भी यादगार बनाता है।
पिंडदान और मोक्ष का महत्व:
कागबेनी गांव में स्थित पवित्र नदी तट पर श्रद्धालु दिवंगत प्रियजनों के लिए पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहाँ पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है। मुक्तिनाथ मंदिर में स्थित 108 पवित्र नलों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त होते हैं और वह पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है। यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु मोक्ष की प्राप्ति के लिए मुक्तिनाथ आते हैं।
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यात्रा का समय और मार्ग:
मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। यात्रा काठमांडू या पोखरा से शुरू की जा सकती है। पोखरा से हवाई मार्ग द्वारा जोमसोम पहुंचा जा सकता है, जो मुक्तिनाथ के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। इसके अलावा जीप या पैदल मार्ग से भी मंदिर तक पहुँचना संभव है। एडवेंचर प्रेमियों के लिए पोखरा से जोमसोम तक की ट्रेकिंग भी बेहद रोमांचक अनुभव है, जिसमें नेपाल की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति का अनुभव सीधे किया जा सकता है।











