US-China Trade War : जबलपुर – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन के प्रति रुख अचानक नरम पड़ गया है, जबकि वे भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर सख्त बने हुए हैं। यूएस-चाइना ट्रेड वॉर में नरमी के संकेत दिख रहे हैं, जिसके तहत ट्रंप ने चीन पर टैरिफ लगाने की डेडलाइन को 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। इस राहत के बदले, ट्रंप ने चीन से अमेरिकी सोयाबीन की खरीद बढ़ाने का भी आग्रह किया है।
सोमवार को, ट्रंप ने चीन के साथ चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच टैरिफ लागू करने की समय सीमा को अगले 90 दिनों के लिए बढ़ाने का ऐलान किया। यह तीसरी बार है जब टैरिफ को टाला गया है। इससे पहले, 2 अप्रैल को टैरिफ की शुरुआत के बाद मई में जिनेवा में हुई ट्रेड वार्ता में इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया गया था। यह मोहलत 12 अगस्त को खत्म होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही इसे फिर से बढ़ा दिया गया है।
अगर यह डेडलाइन नहीं बढ़ती, तो चीन से आने वाले सामानों पर अमेरिकी टैरिफ अप्रैल में लगाए गए उच्च स्तर पर पहुंच जाते। जिनेवा बैठक के बाद, अमेरिका ने चीनी सामानों पर टैरिफ घटाकर 30% कर दिया था, जबकि चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाया था।
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टैरिफ डेडलाइन बढ़ाने के साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन से अमेरिकी सोयाबीन की खरीद को बढ़ाने की अपील भी की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में लिखा, “चीन सोयाबीन की कमी को लेकर चिंतित है। हमारे किसान सबसे ज्यादा उपज वाले सोयाबीन का उत्पादन करते हैं। मुझे उम्मीद है कि चीन जल्द ही अपने अमेरिकी सोयाबीन के ऑर्डर को चार गुना कर देगा।”
ट्रंप ने कहा कि चीन का यह कदम अमेरिका के साथ उसके व्यापार घाटे को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा। उन्होंने अपने पोस्ट के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ‘थैंक्यू’ भी बोला।
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यह सवाल उठ रहा है कि जो ट्रंप टैरिफ वॉर की शुरुआत से ही चीन के प्रति आक्रामक थे, अब वे नरम क्यों पड़ रहे हैं? इसके पीछे कई अहम वजहें हैं:
- अमेरिकी कंपनियों की चीन पर निर्भरता: एप्पल और टेस्ला जैसी कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां अपने उत्पादन के लिए चीन पर निर्भर हैं।
- दुर्लभ धातु का नियंत्रण: चीन दुनिया के 90% से अधिक दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Metals) पर नियंत्रण रखता है। हाल ही में जब चीन ने इनके निर्यात को रोका, तो अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा उत्पादन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा।
इन कारणों से, अमेरिका को चीन के साथ व्यापारिक संबंधों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक हो गया है, जिससे ट्रंप का रुख नरम दिखाई दे रहा है।











