Global Energy Crisis : ईरान युद्ध के बीच दुनिया अब एक नए और खतरनाक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो दुनिया को महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट बना दुनिया की सबसे बड़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के बड़े हिस्से में तेल सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होती है। लेकिन युद्ध और सैन्य तनाव के कारण यहां से तेल और गैस की आवाजाही अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।यही वजह है कि कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इमरजेंसी उपाय शुरू कर दिए हैं।
180 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है कच्चा तेल
फंड मैनेजमेंट कंपनी एबरडीन के मुख्य अर्थशास्त्री पॉल डिगल ने चेतावनी दी है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया के कई देशों में महंगाई बेकाबू हो सकती है। पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ने से आम लोगों पर सीधा असर पड़ेगा।
गर्मी और बढ़ती मांग ने बढ़ाई मुश्किल
गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और हवाई यात्राओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में उछाल आया है।दूसरी ओर, दुनिया भर में तेल भंडार लगातार घट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार मार्च से जून के बीच तेल की मांग उत्पादन से करीब 60 लाख बैरल प्रतिदिन ज्यादा रही।कुछ विशेषज्ञ इसे 90 लाख बैरल प्रतिदिन तक की कमी मान रहे हैं।
भारत समेत कई देशों ने उठाए बड़े कदम
ऊर्जा संकट को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन और खाद भंडारण के लिए 10 अरब डॉलर खर्च करने का फैसला किया है। फ्रांस ने भी अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राहत योजनाओं का दायरा बढ़ाया है।भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने के लिए लोगों से सोना कम खरीदने और विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है।
दुनिया में मंदी का खतरा बढ़ा
IEA के मुताबिक पहले 55 देशों ने इमरजेंसी कदम उठाए थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 76 से ज्यादा हो चुकी है।अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह नहीं खुला, तो दुनिया मंदी की चपेट में जा सकती है।यूरोपीय संघ के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अपोस्टोलोस त्जित्जिकोस्तास ने भी हालात को बेहद गंभीर बताया है।
पेट्रोल-डीजल राशनिंग तक की नौबत
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर संकट और बढ़ा तो कई देशों में पेट्रोल-डीजल की राशनिंग शुरू करनी पड़ सकती है। इससे फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ेगा।फिलहाल ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है। लेकिन अगर कीमत 150 डॉलर पार करती है तो दुनिया को भारी महंगाई और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में असर शुरू
पाकिस्तान, श्रीलंका और फिलीपींस जैसे देशों में ईंधन संकट के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं। कुछ देशों ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू कर दिया है ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।सबसे ज्यादा असर एविएशन, ट्रांसपोर्ट और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।
क्या जल्द मिलेगी राहत?
कुछ अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि यदि युद्धविराम मजबूत हुआ और तेल सप्लाई सामान्य हुई तो कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ सकती हैं।लेकिन फिलहाल दुनिया की नजर मध्य पूर्व के हालात और होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई है, क्योंकि यही आने वाले महीनों की वैश्विक अर्थव्यवस्था तय करेगा।









