झारखंड विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव लाएगी सरकार, केंद्र पर अधिकार छीनने का आरोप

झारखंड विधानसभा : रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) के विरोध में झारखंड सरकार अब विधानसभा में प्रस्ताव लाने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को सदन में रखने पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव आगामी 4 अगस्त को विधानसभा में पेश किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि SIR के जरिए केंद्र सरकार राज्य के मतदाता सूची में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है, जो संविधान की भावना और राज्य के अधिकारों के खिलाफ है। इस प्रस्ताव को पारित कर केंद्र सरकार को एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की तैयारी की जा रही है।

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SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची की व्यापक जांच और संशोधन किया जाता है। हालांकि, झारखंड की सत्ताधारी पार्टियों – झामुमो और कांग्रेस – का आरोप है कि केंद्र सरकार इसके जरिए राज्य के आदिवासी और पिछड़े वर्गों के मतदाता अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही है। इस वजह से विधानसभा में इसका विरोध प्रस्ताव लाया जा रहा है।

मानसून सत्र से ठीक पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने आवास पर पार्टी विधायकों और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, प्रदेश सह प्रभारी डॉ. सीरीबेला प्रसाद, मंत्री राधाकृष्ण किशोर, शिल्पी नेहा तिर्की, अनूप सिंह, हेमलाल मुर्मू, सुरेश पासवान, संजय प्रसाद सिंह यादव, नरेश प्रसाद सिंह, उमाकांत रजक सहित कई विधायक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को सत्र के दौरान पूर्ण रूप से सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया कि वे सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को जनता के बीच ज़ोर-शोर से रखें।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, SIR के खिलाफ प्रस्ताव 4 अगस्त को विधानसभा में पेश किया जाएगा और उस दिन इस पर चर्चा के बाद मतदान होगा। सरकार को भरोसा है कि सदन में इस प्रस्ताव को पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी क्योंकि झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है।

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह प्रस्ताव केवल तकनीकी नहीं, बल्कि केंद्र बनाम राज्य के अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक भी है। राज्य सरकार इसे एक “संवैधानिक लड़ाई” के रूप में जनता के सामने रखने की रणनीति अपना रही है।

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