Dara Singh Release: दारा सिंह रिहाई को लेकर एक बार फिर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। ओडिशा की क्योंझर जिला जेल में पिछले 26 वर्षों से बंद ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड के दोषी दारा सिंह की समय से पहले रिहाई का मामला अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि तय प्रक्रिया पूरी कर जल्द फैसला लिया जाए।
दारा सिंह रिहाई मामले में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई करते हुए ओडिशा सरकार को 15 अगस्त तक आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का समय दिया है। अदालत ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर इस मामले पर निर्णय लेगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
सजा समीक्षा बोर्ड ने की सिफारिश
दारा सिंह रिहाई पर ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने हाल ही में बैठक की थी। इस बैठक में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समय से पहले रिहाई पर विचार किया गया। इसी दौरान दारा सिंह का मामला भी समीक्षा के लिए रखा गया और उसकी रिहाई की सिफारिश की गई।
रिहाई की प्रक्रिया क्यों शुरू हुई?
दारा सिंह रिहाई की प्रक्रिया ओडिशा सरकार की रिमिशन (सजा में छूट) नीति के तहत आगे बढ़ रही है। इस नीति के अनुसार जिन दोषियों की मौत की सजा बाद में उम्रकैद में बदल दी गई हो और जिन्होंने 25 वर्ष या उससे अधिक समय जेल में बिताया हो, वे सजा में छूट के पात्र हो सकते हैं। अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भर करता है।
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क्या बोले दारा सिंह के वकील?
दारा सिंह रिहाई पर उनके वकील ए.पी. सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने अदालत को जानकारी दी है कि सजा समीक्षा बोर्ड अपना विचार कर चुका है। फिलहाल कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। उनके अनुसार अदालत ने सरकार से प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।
क्या था ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड?
दारा सिंह रिहाई की चर्चा के साथ 1999 का चर्चित ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड भी फिर सुर्खियों में है। 22 जनवरी 1999 की रात ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटे फिलिप और टिमोथी वाहन में सो रहे थे। इसी दौरान वाहन में आग लगा दी गई, जिससे तीनों की मौत हो गई।
जांच और अदालत का फैसला
दारा सिंह रिहाई से जुड़ा यह मामला सीबीआई ने जांचा था। विशेष अदालत ने दारा सिंह समेत 14 लोगों को दोषी ठहराया था। वर्ष 2003 में ट्रायल कोर्ट ने दारा सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में 2005 में ओडिशा हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
रिहाई पर अंतिम फैसला बाकी
दारा सिंह रिहाई पर अंतिम निर्णय अभी राज्य सरकार को लेना है। हालांकि सजा समीक्षा बोर्ड की सिफारिश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यह मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब सभी की नजर सरकार के अंतिम फैसले और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।







