Monday, August 31, 2026
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CG News: E20 पेट्रोल पर पहली बड़ी कानूनी चोट! कोर्ट ने कंपनी पर ठोका भारी जुर्माना, नई कार और मुआवजा देने का आदेश

E20 Fuel Consumer Court Verdict: E20 पेट्रोल विवाद को लेकर रायपुर से एक अहम फैसला सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कार मालिक की शिकायत पर वाहन निर्माता कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता को नया E20 सपोर्टेड वाहन उपलब्ध कराया जाए। यदि ऐसा तय समय में नहीं किया जाता है तो वाहन की पूरी कीमत और अन्य खर्च वापस करने होंगे। इस फैसले को E20 पेट्रोल विवाद से जुड़े शुरुआती और महत्वपूर्ण मामलों में माना जा रहा है।

E20 पेट्रोल विवाद की शुरुआत रायपुर निवासी डॉक्टर प्रेमराज देब्ता की शिकायत से हुई। उन्होंने जून 2024 में मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस एसयूवी खरीदी थी। वाहन का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था। उनका कहना था कि E20 पेट्रोल भरवाने के बाद कार के इंजन में लगातार दिक्कतें आने लगीं। इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हुई, मिसफायरिंग की समस्या सामने आई और माइलेज भी कम हो गया।

बार-बार सर्विस के बाद भी नहीं मिली राहत
E20 पेट्रोल विवाद में शिकायतकर्ता ने बताया कि वाहन को कई बार अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया। कई बार मरम्मत के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। लगातार आ रही तकनीकी परेशानी और अतिरिक्त खर्च से परेशान होकर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

कंज्यूमर कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
E20 पेट्रोल विवाद पर सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को उसी मॉडल का नया E20 सपोर्टेड वाहन देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि उपभोक्ता को वही उत्पाद मिलना चाहिए जिसकी जानकारी और क्षमता के आधार पर वाहन खरीदा गया था।
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नई कार नहीं दी तो लौटाने होंगे 20.50 लाख रुपये
E20 पेट्रोल विवाद में आयोग ने वैकल्पिक आदेश भी जारी किया है। यदि कंपनी तय समय में नया वाहन उपलब्ध नहीं कराती है तो उसे वाहन की कीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1.86 लाख रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये सहित कुल 20,50,494 रुपये वापस करने होंगे।

मानसिक क्षति और अन्य खर्च का भी देना होगा भुगतान
E20 पेट्रोल विवाद में आयोग ने केवल वाहन की कीमत लौटाने तक ही मामला सीमित नहीं रखा। आदेश के अनुसार कंपनी को शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा और 10 हजार रुपये वाद व्यय भी देना होगा। यदि आदेश का समय पर पालन नहीं किया गया तो निर्धारित राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

क्यों माना जा रहा है अहम फैसला?
E20 पेट्रोल विवाद से जुड़े इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को गंभीरता से लिया है। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए भी अहम माना जा रहा है, जो किसी उत्पाद या वाहन को उसकी घोषित विशेषताओं के आधार पर खरीदते हैं।

आगे क्या होगा?
E20 पेट्रोल विवाद में अब निगाहें इस बात पर होंगी कि संबंधित कंपनी आयोग के आदेश का पालन करती है या नहीं। यदि आदेश के अनुसार नया वाहन उपलब्ध कराया जाता है तो यह मामला E20 ईंधन से जुड़े विवादों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। वहीं आदेश का पालन नहीं होने पर कंपनी को आर्थिक दायित्व का सामना करना पड़ सकता है।

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