Friday, September 11, 2026
Home National Delhi Protest Update: दिल्ली में फिर होगा आंदोलन? जंतर-मंतर हिंसा के केस...

Delhi Protest Update: दिल्ली में फिर होगा आंदोलन? जंतर-मंतर हिंसा के केस वापस नहीं होने पर भड़की CJP, दिल्ली पुलिस बोली- आदेश मिलने पर होगी कार्रवाई

Delhi Protest Update: नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान हुई हिंसा और बवाल के बाद दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर नया सियासी और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।

CJP ने केंद्र सरकार पर समझौते का पालन न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कार्यकर्ताओं व छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो पार्टी दिल्ली में दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे अभी तक सरकार या गृह मंत्रालय से मामले वापस लेने का कोई आधिकारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।

20 जुलाई प्रदर्शन का पूरा घटनाक्रम और दर्ज केस

20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ते CJP के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था, वहीं प्रदर्शनकारियों पर भी पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की और पथराव के आरोप लगे थे।

  • कुल मामले: जंतर-मंतर हिंसा और उससे जुड़ी घटनाओं में लगभग 20 केस दर्ज किए गए हैं।

  • धाराएं व आरोप: इनमें से 14 एफआईआर उग्र प्रदर्शन और हिंसा से जुड़ी हैं, जबकि एक मामला बिना प्रशासनिक अनुमति के ड्रोन उड़ाने से संबंधित है।

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: आंदोलन के भारी दबाव के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था, जिसके बाद सरकार और CJP के बीच समझौते के आधार पर आंदोलन स्थगित किया गया था।

केस वापसी की क्या है कानूनी प्रक्रिया?

दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले को वापस लेने की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया (Legal Procedure) होती है:

  1. शासकीय निर्देश: केंद्र सरकार पहले दिल्ली पुलिस को औपचारिक आदेश जारी करेगी कि वह राज्य हित में इन मामलों को आगे नहीं चलाना चाहती।

  2. एलजी की मंजूरी: दिल्ली पुलिस की अभियोजन शाखा (Prosecution Branch) इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल (LG) के पास मंजूरी के लिए भेजेगी।

  3. अदालत का अंतिम फैसला: उपराज्यपाल से हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालतों में आवेदन दाखिल करेगी। हालांकि, मुकदमों को रद्द करने या वापस लेने का अंतिम अधिकार संबंधित अदालत (Court) के पास ही सुरक्षित रहता है।

पत्रकारों पर हमले वाले केस वापस नहीं होंगे

पुलिस सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों (Journalists) और मीडियाकर्मियों पर हुए हमले व मारपीट से जुड़े मामलों को वापस लेने का कोई विचार या प्रस्ताव नहीं है। इन मामलों में शामिल उपद्रवियों पर कानूनी कार्रवाई और तफ्तीश पहले की तरह ही निष्पक्ष रूप से जारी रहेगी।

CJP का आरोप: “समझौते का नहीं हो रहा पालन”

एफआईआर वापसी में हो रही देरी और पुलिस की कार्रवाई पर CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

  • छात्रों के उत्पीड़न का दावा: रांका ने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों निर्दोष छात्रों को हिरासत में लिया गया है। दिल्ली समेत कई राज्यों में आंदोलन से जुड़े युवाओं की पुलिस निगरानी कर रही है।

    CJP की मुख्य मांगें:

    1. प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी 20 एफआईआर तत्काल प्रभाव से रद्द की जाएं।

    2. हिरासत और जेल में बंद सभी छात्र-कार्यकर्ताओं को अविलंब रिहा किया जाए।

    3. भविष्य में इस आंदोलन के सिलसिले में किसी भी छात्र पर नया केस दर्ज न हो।

    4. सरकार के साथ हुए लिखित समझौते की प्रति सार्वजनिक की जाए और उसकी समय-सीमा तय हो।

रांका ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया, तो CJP देश भर के छात्रों को गोलबंद कर एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर उतरने को बाध्य होगी।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here