Rewa News: रीवा संभाग से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। मऊगंज नगर परिषद में पदस्थ उपयंत्री राजेश प्रताप सिंह ने अपनी लंबित मांगों और आर्थिक संकट के विरोध में ऐसा कदम उठाया, जिसकी आमतौर पर किसी सरकारी कर्मचारी से उम्मीद नहीं की जाती।
Rewa News: जानकारी के अनुसार, उपयंत्री राजेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले करीब 10 महीनों से जीवन निर्वाह भत्ता नहीं दिया गया है। लगातार आवेदन देने और शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं। उनका कहना है कि परिवार का खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया है।
Rewa News: स्थिति से परेशान होकर उन्होंने पहले नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त संचालक को लिखित पत्र सौंपा था। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि उनकी समस्या का समाधान समय पर नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर सड़क पर भीख मांगकर विरोध करेंगे।
Rewa News: इसी चेतावनी को अमल में लाते हुए गुरुवार को वे रीवा शहर के एक व्यस्त चौराहे पर पहुंच गए। वहां उन्होंने सामान्य जींस और चमकदार शर्ट पहनकर हाथ में कटोरा लिया और राहगीरों से भीख मांगना शुरू कर दिया। इस घटना को देखकर मौके पर मौजूद लोग हैरान रह गए, क्योंकि एक सरकारी उपयंत्री को इस तरह सड़क पर भीख मांगते देखना सभी के लिए असामान्य और अप्रत्याशित था।
Rewa News: कुछ ही देर में वहां मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो तेजी से वायरल हो गया और इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
Rewa News: उपयंत्री का आरोप है कि उनके मामलों को लंबे समय से जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उन्हें यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
Rewa News: इस घटना के बाद नगरीय प्रशासन विभाग में भारी हलचल देखी जा रही है। हालांकि विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने विभागीय कार्यप्रणाली, भुगतान व्यवस्था और कर्मचारियों की समस्याओं के निपटारे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Rewa News: फिलहाल यह मामला रीवा ही नहीं बल्कि पूरे संभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और उपयंत्री की समस्याओं का समाधान कब तक किया जाता है।









