TMC Crisis: TMC सांसदों की बगावत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक मतभेद अब खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। विधायकों के बाद अब कुछ सांसदों ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताते हुए लोकसभा में अलग गुट बनाने की मांग रख दी है।बागी सांसदों ने अपनी मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में संसद के भीतर अलग पहचान और स्वतंत्र बैठने की व्यवस्था देने का अनुरोध किया गया है।
TMC सांसदों की बगावत उस समय और चर्चा में आ गई जब बागी सांसदों का पत्र सार्वजनिक हुआ। इस पत्र में कई सांसदों के नाम और हस्ताक्षर शामिल बताए जा रहे हैं। सांसदों का कहना है कि पार्टी के अंदर उनकी बातों को उचित स्थान नहीं दिया जा रहा था, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला इस पत्र पर संसदीय नियमों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर फैसला ले सकते हैं।
काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में उठी आवाज
जानकारी के मुताबिक TMC सांसदों की बगावत की अगुवाई सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। उनके नेतृत्व में कई सांसदों ने अलग गुट बनाने की मांग को समर्थन दिया है।इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष की ओर इशारा करता है।
According to Sources here is the list of 19 out of 20 TMC breakaway MPs that sent their names to the Lok Sabha Speaker’s Office on May 18th.
1. Kakoli Ghosh Dastidar
2. Satabdi Roy
3. Bapi Haldar
4. Dr. Sharmila Sarkar
5. Prasun Bandyopadhyay
6. Jagadish Barma Basunia
7. Asit… pic.twitter.com/MM2rPhYuaf— ANI (@ANI) June 12, 2026
इन सांसदों ने किए पत्र पर हस्ताक्षर
TMC सांसदों की बगावत से जुड़े पत्र पर जिन सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बैग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक के नाम शामिल हैं।
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आने वाले दिनों में बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
TMC सांसदों की बगावत ने बंगाल की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस मांग को मंजूरी देते हैं तो संसद में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति और रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।फिलहाल सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और ममता बनर्जी की अगली राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।









