Jheeram Barsi 2026: जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे काले पन्नों में शुमार ‘झीरम घाटी नक्सली हमले’ की आज 13वीं बरसी पर बस्तर संभाग सहित समूचे प्रदेश में सियासी और भावुक सरगर्मी तेज हो गई है। देश के इस सबसे बड़े राजनीतिक शहादत दिवस पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जन-प्रतिनिधियों और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने जगदलपुर सहित विभिन्न अंचलों में भव्य श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया। इस दौरान शीर्ष कांग्रेसी नेताओं और वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए भावभीनी विधिक अंजलि अर्पित की गई। हालांकि, शहादत के इस विधिक मोड़ पर न्याय की धीमी रफ्तार को लेकर सूबे की सियासत एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कांड की अधूरी जांच, वास्तविक मास्टरमाइंड के अब तक बेनकाब न होने और सुरक्षा दावों को लेकर केंद्र व राज्य की मौजूदा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
13 वर्ष बाद भी न्याय अधूरा; सच्चाई को दबाने का लग रहा है आरोप: सुशील मौर्य
शहादत दिवस के विधिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने अपनी आधिकारिक मीडिया बाइट और वक्तव्य में न्याय प्रक्रिया की कछुआ चाल पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।
जिला अध्यक्ष का वक्तव्य: “25 मई 2013 को झीरम घाटी में जो हुआ, वह केवल एक नक्सली हमला नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर किया गया अब तक का सबसे वीभत्स और सोची-समझी विधिक साजिश का हिस्सा था। आज इस कायराना हमले को पूरे 13 वर्ष गुजर चुके हैं, परंतु अत्यंत दुख और विस्मय का विषय है कि पीड़ित परिवारों को आज तक विधिक न्याय नहीं मिल पाया है। आज भी देश और प्रदेश की जनता के सामने इस खूनी खेल की पूरी सच्चाई नहीं आ सकी है और इसके पीछे छिपे बैठे सफेदपोश मास्टरमाइंड आज भी कानून के शिकंजे से दूर बेखौफ घूम रहे हैं।”
डबल इंजन सरकार और नक्सलवाद खात्मे के दावों पर तीखे विधिक सवाल: रेखचंद जैन
श्रद्धांजलि सभा के मंच से सूबे की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए बस्तर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने सरकार के दावों की विधिक धरातल पर घेराबंदी की:
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अधूरी जांच का मुद्दा: पूर्व विधायक ने सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों ही जगहों पर एक ही दल की ‘डबल इंजन सरकार’ कार्यरत है। इसके बावजूद झीरम कांड की विधिक जांच को तार्किक परिणति तक पहुंचाने में इच्छाशक्ति का घोर अभाव दिखाई दे रहा है। पीड़ित परिवार आज भी न्याय की आस में अदालतों और जांच आयोगों की फाइलों को निहार रहे हैं।
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रणनीति पर सवाल: सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे नक्सलवाद की पूर्ण समाप्ति और बस्तर में अमन-चैन बहाली के दावों पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा कि यदि तंत्र इतना ही सुदृढ़ हो चुका है, तो झीरम हमले की फाइलों में दफन वास्तविक चेहरों की पहचान अब तक विधिक रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
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ग्रामीणों के उत्पीड़न का आरोप: कांग्रेस नेताओं ने एक अत्यंत गंभीर विधिक आरोप लगाते हुए कहा कि जांच एजेंसियां वास्तविक षड्यंत्रकारियों और बड़े अपराधियों तक पहुंचने की विधिक जहमत उठाने के बजाय बस्तर के स्थानीय निर्दोष ग्रामीणों पर दंडात्मक कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रही हैं, जो कि मानवाधिकारों के भी विरुद्ध है।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष रहेगा जारी; सच लाकर रहेंगे सामने
जगदलपुर में आयोजित इस श्रद्धांजलि संकल्प सभा में बस्तर संभाग के प्रबुद्ध नागरिकों और शहीदों के परिजनों ने भी हिस्सा लिया। कांग्रेस संगठन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव दोहराया कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों, बस्तर की अस्मिता और अपने दिवंगत नेताओं के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगी। इस संवेदनशील मामले में जब तक अंतिम विधिक न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता और एनआईए (NIA) या विशेष विधिक जांच दल (SIT) की अंतिम सत्य रिपोर्ट देश की संसद और राज्य की विधानसभा के पटल पर नहीं आ जाती, तब तक कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक अपनी विधिक और राजनीतिक लड़ाई व संघर्ष को पूरी मुस्तैदी से जारी रखेगी।









