Indian Economy: नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (25 मई 2026) को स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertilizer) और सोने की आसमान छूती व उतार-चढ़ाव से भरी कीमतें भारत के लिए सबसे गंभीर बाहरी आर्थिक चुनौतियां पैदा कर रही हैं। 37वें सिडबी (SIDBI) स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने इन समसामयिक आर्थिक दबावों को सीधे तौर पर जारी पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से जोड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिकूलताओं के बावजूद भारत के आंतरिक आर्थिक संकेतक (Domestic Indicators) पूरी तरह मजबूत और लचीले बने हुए हैं। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता अपने नागरिकों की रक्षा करना, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को वित्तीय संबल देना तथा देश की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को निर्बाध गति से चालू रखना है।
विदेशी मुद्रा पर दबाव और ‘3Fs’ का विधिक संदर्भ
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के आह्वान की पृष्ठभूमि को विस्तार से समझाया।
वित्त मंत्री का वक्तव्य: “अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें न केवल उच्च स्तर पर हैं, बल्कि वे बेहद गतिशील और परिवर्तनशील हैं। पिछले 80 से 90 दिनों से स्थिति यह है कि एक सप्ताह कुछ और रेट होता है और अगले ही सप्ताह वह पूरी तरह बदल जाता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय उर्वरक कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। तीसरा बड़ा दबाव सोने (Gold) की ऊंची कीमतों का है। इन तीनों महत्वपूर्ण घटकों (ईंधन, खाद और सोना) के आयात के लिए हमें विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) में ही भुगतान करना होता है, क्योंकि यहां कोई रुपया व्यापार (Rupee Trading) का विकल्प नहीं है। यही हमारी अर्थव्यवस्था के लिए ‘3Fs’— फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेन एक्सचेंज की चुनौती है।”
पश्चिम एशिया संकट का घरेलू व्यापार और MSMEs पर सीधा असर
श्रीमती सीतारमण ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव केवल एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके तात्कालिक व्यावसायिक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इस संकट के कारण माल ढुलाई में देरी, नौवहन (Shipping) लागत में अप्रत्याशित वृद्धि, कच्चे माल की कमी, उद्योगों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) पर अतिरिक्त दबाव और निर्यात ऑर्डरों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो रही है। सरकार का दृष्टिकोण पूरी तरह स्पष्ट है। इस दौर में भारतीय नागरिकों को महंगाई से बचाना, निर्यातकों को सुरक्षित रखना और देश के आर्थिक स्थायित्व को बनाए रखना सरकार की विधिक प्रतिबद्धता है।
घरेलू मोर्चे पर रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े; नकारात्मक ताकतों को दी चेतावनी
विदेशी मोर्चे पर जारी विपरीत हवाओं के बीच वित्त मंत्री ने देश के मजबूत आंतरिक आर्थिक आंकड़ों का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए निराशावादी विमर्श की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत का एक ऐसा वर्ग है जो बहुत जल्दी देश के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकने की कोशिश करता है और एक भयावह, नकारात्मक नैरेटिव खड़ा करता है। देश ऐसे ‘डर के माहौल’ (Fear-mongering) को बर्दाश्त नहीं कर सकता।
अर्थव्यवस्था की मजबूती के तीन बड़े प्रमाण:
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ऐतिहासिक जीएसटी संग्रह: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का सकल जीएसटी संग्रह (Gross GST Collection) $22,000,000 करोड़ रुपये ($22 लाख करोड़) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3% की शानदार वृद्धि को दर्शाता है।
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ट्रैक्टर बिक्री में आक्रामक तेजी: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देते हुए घरेलू थोक ट्रैक्टर की बिक्री में 26% का अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है।
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पैसेंजर वाहनों की रिकॉर्ड मांग: देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी बरकरार है और पैसेंजर वाहनों की घरेलू बिक्री में 25% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
राहत उपाय: ₹1 लाख करोड़ का टैक्स कट और ₹2.55 लाख करोड़ का क्रेडिट सपोर्ट
वैश्विक संकट के असर से भारतीय नागरिकों और छोटे उद्योगों को बचाने के लिए वित्त मंत्री ने सरकार द्वारा उठाए गए दो बड़े विधिक और आर्थिक कदमों को रेखांकित किया:
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ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को घरेलू बाजार पर पड़ने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में ₹10 प्रति लीटर की बड़ी कटौती की है। इस जनकल्याणकारी कदम से सरकारी खजाने पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक का अतिरिक्त राजस्व भार आएगा।
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MSME सेक्टर के लिए ECLGS 5.0: देश के रीढ़ माने जाने वाले लघु उद्योगों को कार्यशील पूंजी के संकट से उबारने के लिए सरकार ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 (Emergency Credit Liquidity Guarantee Scheme 5.0) के तहत अतिरिक्त ₹2.55 लाख करोड़ रुपये के ऋण की व्यवस्था की है। इस योजना के अंतर्गत MSMEs को दिए जाने वाले कर्ज पर भारत सरकार 100% गारंटी कवरेज प्रदान कर रही है, ताकि बैंकिंग तंत्र बिना किसी झिझक के उद्योगों को वित्तीय सहायता दे सके।









