Digital Arrest Awareness: डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का बड़ा एक्शन; देश का पहला एआई-बेस्ड रियल टाइम नोटिस वेरिफिकेशन चैटबॉट ‘ABHAY’ लॉन्च, अब ठगों के फर्जी नोटिस की मिनटों में खुलेगी पोल
नई दिल्ली/रायपुर। देश में तकनीक के विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराधियों द्वारा मासूम और पढ़े-लिखे नागरिकों को डराकर ठगी करने का ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP) के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, केवल वर्ष 2024 में डिजिटल अरेस्ट और इससे जुड़े साइबर अपराधों के 1.23 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जिनमें ठगों ने नागरिकों से करीब 1,935.51 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि लूट ली। वहीं, वर्ष 2025 के शुरुआती दो महीनों में ही 17,718 मामलों में 210.21 करोड़ रुपए की ठगी की जा चुकी है।
इस गंभीर राष्ट्रीय समस्या से निपटने और आम नागरिकों को भयमुक्त व जागरूक बनाने के लिए ‘सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ (CBI) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक विशेष हेल्पबॉट ‘ABHAY’ (अभय) लॉन्च किया है। यह टूल केंद्रीय एजेंसियों के नाम पर भेजे जा रहे फर्जी और कूटरचित कानूनी नोटिसों की सत्यता को रियल-टाइम में वेरिफाई (जांच) करने की सुविधा प्रदान करता है।
क्या है ‘ABHAY’ चैटबॉट और कैसे काम करता है यह सिस्टम?
उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर और विख्यात एक्सपर्ट राहुल मिश्रा के अनुसार, ‘ABHAY’ का शाब्दिक अर्थ होता है— “भय से पूरी तरह मुक्त”। साइबर अपराधी अक्सर आम नागरिकों को कानूनी धाराओं, जेल भेजने और सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने का डर दिखाकर मानसिक दबाव में ले लेते हैं। यह चैटबॉट इसी ‘डर’ को खत्म करने का माध्यम बनेगा। यह नागरिकों के लिए बनाया गया देश का पहला लाइव वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म है।
यह सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित और स्वचालित है, जो निम्नलिखित चरणों के आधार पर काम करता है:
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आधिकारिक पोर्टल पर पहुंच: किसी भी नागरिक को यदि ईमेल, वॉट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस के जरिए सीबीआई का कोई नोटिस प्राप्त होता है, तो उन्हें घबराने के बजाय सीधे सीबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
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चैटबॉट इंटरेक्शन: वेबसाइट पर उपलब्ध ‘ABHAY’ हेल्पबॉट पर क्लिक करते ही एआई असिस्टेंस सक्रिय हो जाता है, जो यूजर को संवाद के जरिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड करता है।
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फॉर्मेट और डेटा एनालिसिस: यूजर द्वारा प्राप्त नोटिस का विवरण (जैसे संदर्भ संख्या, जारी करने वाले का नाम या डिजिटल कॉपी) दर्ज करते ही एआई एल्गोरिदम नोटिस के पैटर्न, फॉन्ट, फॉर्मेट और सीबीआई के आधिकारिक डेटाबेस का विश्लेषण करता है।
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तत्काल परिणाम: विश्लेषण के तुरंत बाद चैटबॉट रियल-टाइम में बता देता है कि उक्त नोटिस सीबीआई द्वारा जारी किया गया है या यह किसी स्कैमर की फर्जी चाल है।
क्या एआई (AI) से गलती की गुंजाइश है?
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकि ‘ABHAY’ एक मशीन लर्निंग मॉडल पर आधारित है जो निरंतर मिल रहे इनपुट से खुद को अपग्रेड करता है, इसलिए दुर्लभ मामलों में तकनीकी त्रुटि की मामूली गुंजाइश हो सकती है। ऐसी स्थिति में यदि चैटबॉट नोटिस को संदिग्ध बताता है, तो नागरिक को तुरंत सीबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर आधिकारिक पुष्टि कर लेनी चाहिए। अच्छी बात यह है कि इस बॉट का मास्टर कोड और जनरेटिव एक्सेस केवल सीबीआई के पास सुरक्षित है, जिससे साइबर अपराधी इस सुरक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की सेंधमारी या इसका दुरुपयोग नहीं कर सकते।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के मुख्य रेड फ्लैग्स: कैसे पहचानें कि सामने वाला ठग है?
अक्सर लोग पुलिस या सीबीआई का नाम सुनकर बिना सोचे-समझे डर जाते हैं। साइबर एडवाइजर राहुल मिश्रा ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत (Red Flags) साझा किए हैं, जिनकी मदद से फर्जी कॉल या नोटिस को आसानी से पहचाना जा सकता है:
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पैसे का तत्काल दबाव: कोई भी असली जांच एजेंसी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर केस रफा-दफा करने के लिए तुरंत पैसे जमा करने, आरटीजीएस (RTGS) करने या किसी पर्सनल बैंक अकाउंट में राशि ट्रांसफर करने का दबाव नहीं बनाती।
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‘सीक्रेट’ वीडियो कॉल जांच: कानूनन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जहां किसी आरोपी को वीडियो कॉल (स्काइप, वॉट्सएप या जूम) पर चौबीस घंटे स्क्रीन के सामने बैठकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ या नजरबंद रखा जाए।
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धमकी भरी और अशुद्ध भाषा: फर्जी नोटिसों में अक्सर डराने-धमकाने वाले शब्दों का अत्यधिक प्रयोग होता है, साथ ही उनमें अंग्रेजी या हिंदी व्याकरण की गंभीर गलतियां और स्पेलिंग मिस्टेक्स होती हैं।
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अनजान स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स: ठग अक्सर जांच के नाम पर पीड़ितों को अपने मोबाइल में ‘TeamViewer’ या ‘AnyDesk’ जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं, जिससे वे आपके नेट बैंकिंग और ओटीपी (OTP) का पूरा एक्सेस चुरा लेते हैं।
संदिग्ध स्थिति में क्या करें? बुजुर्गों को विशेष रूप से करें जागरूक
यदि आपके घर में या किसी परिचित को ऐसा कोई संदिग्ध कॉल या नोटिस आता है, तो सबसे पहले शांत रहें और बिल्कुल न घबराएं। अपनी कोई भी निजी जानकारी, बैंक डिटेल, आधार, पैन या ओटीपी साझा न करें। अज्ञात व्यक्तियों के कहने पर कोई भी ऐप इंस्टॉल न करें।
विशेष रूप से घर के बुजुर्गों को इस संबंध में जागरूक करें, क्योंकि डिजिटल माध्यमों की कम जानकारी होने के कारण वे इन ठगों के आसान निशाने पर होते हैं। उन्हें समझाएं कि ऐसा कोई भी नोटिस मिलने पर तुरंत अपने परिवार के युवाओं को सूचित करें। यदि किसी भी कारणवश आप ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं या www.cybercrime.gov.in पर जाकर ट्रांजैक्शन ब्लॉक करने हेतु आवेदन करें। सीबीआई की यह ‘अभय’ पहल देश में साइबर साक्षरता (Cyber Literacy) बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।









