Dhar Bhojshala Case : इंदौर : आज इंदौर हाई कोर्ट में धार के विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद को लेकर आज 15 मई शुक्रवार के दिन ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया। हाईकोर्ट के वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने हाई कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक फैसला बताते हुए सनातन धर्म की जीत बताया है।
आपको बता दे कि पांच याचिकाओं और पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ ही एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर इंदौर हाईकोर्ट डबल बेंच ने यह फैसला सुनाया और कहा कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर था और रहेगा, साथ ही 1958 के एक्ट के तहत एएसआई इसका निरंतर सर्वे भी जारी रखेगा।
Dhar Bhojshala Case : हम आपको बता दें कि 2022 से हिंदू फ़्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर हाई कोर्ट में भोजशालला मुद्दे को लेकर याचिका दायर की थी, तभी से यह मामला पुरे देश भर में चर्चाओं में रहा। हम आपको बातएंगे कि आज हाईकोर्ट ने क्या फैसला किया है,क्या निर्देश दिए हैं। अपने फैसले में हाई कोर्ट के जज विनय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी ने माना है की भोजशाला 11 वी शताब्दी के परमार वंश के महान राजा राजा भोज के समय में मां सरस्वती (वाघ देवी) का मंदिर और संस्कृत अध्ययन क़े लिए स्थापित किया था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मा सरस्वती कि मूर्ति सरकार द्वारा स्थापित की जा सकती है।
Dhar Bhojshala Case : – हालांकि इसके पूर्व मुस्लिम समाज ने हाई कोर्ट के विपरीत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि कमाल मौला मस्जिद में सर्वे रुकवाया जाए और मुसलमानों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरासर इस अपील को ठुकराते हुए हाईकोर्ट को फैसला करने की मंजूरी दी, और इसी कड़ी में आज एएसआईं रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट इंदौर द्वारा या फैसला किया गया है। हालांकि मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात कही है, वही यह भी हो सकता है कि मुस्लिम पक्ष सरकार से इस फैसले की पुन समीक्षा करने की अपनी अपील रखें।









