Health System Failure : बरगी (जबलपुर): जबलपुर जिले के बरगी क्षेत्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की व्यवस्थाएं इन दिनों खुद ‘बीमार’ नजर आ रही हैं। नेशनल हाईवे पर स्थित होने के कारण यहाँ चौबीस घंटे मुस्तैद स्वास्थ्य सेवाओं की दरकार है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। शाम ढलते ही यह अस्पताल केवल एक नर्स के भरोसे रह जाता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में पहुँचने वाले मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति और जिम्मेदार अधिकारियों के उदासीन रवैये ने स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
ताजा घटना ने खोली दावों की पोल अस्पताल की लापरवाही का ताजा उदाहरण कल रात देखने को मिला, जब बाइक सवार चार लोग गाय से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल इलाज की उम्मीद में बरगी CHC लाया गया, लेकिन वहाँ कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। प्राथमिक उपचार के अभाव में घायलों को जबलपुर रेफर कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ (कीमती समय) अस्पताल की इस अव्यवस्था और रेफर करने की मजबूरी के कारण बर्बाद हो जाता है।
व्यवस्था के नाम पर केवल खानापूर्ति ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय इमरजेंसी वार्ड में केवल एक स्टाफ नर्स तैनात रहती है, जिसे दवाइयों से लेकर मरहम-पट्टी तक सब कुछ अकेले संभालना पड़ता है। अस्पताल में सुरक्षा गार्डों का भी अभाव है, जिससे रात की ड्यूटी में महिला स्टाफ खुद को असुरक्षित महसूस करता है। ड्यूटी पर तैनात नर्स ने भी अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि वह अपनी क्षमता के अनुसार मदद करती हैं, लेकिन डॉक्टर के बिना उनका काम भी सीमित है।
जिम्मेदारों का शर्मनाक जवाब जब इस गंभीर अव्यवस्था के बारे में बीएमओ (BMO) रश्मि भटनागर से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने समाधान निकालने के बजाय व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “भैया जी, आप ही डॉक्टर पोस्ट करवा दीजिए।” स्वास्थ्य विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी का ऐसा जवाब यह दर्शाता है कि विभाग बरगी के लोगों की जान की कितनी परवाह करता है। क्षेत्र के नागरिकों ने अब प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि बरगी अस्पताल में रात के समय डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती सुनिश्चित की जाए।









