Friday, September 11, 2026
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CG Coal Levy Scam: पूर्व IAS रानू साहू के केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! रिश्तेदारों की याचिकाएं खारिज, अटैच ही रहेगी करोड़ों की संपत्ति

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरबा की पूर्व और निलंबित कलेक्टर रानू साहू से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ED द्वारा की गई संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई को वैध ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

करोड़ों की संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं अटैच

यह मामला कथित कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रानू साहू के रिश्तेदारों—तुषार साहू, पंकज साहू, पीयूष साहू, पूनम साहू, अरुण साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू—की करोड़ों रुपए की संपत्तियों को अटैच किया था।

इन सभी ने अदालत में याचिका दायर कर संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं के तर्क खारिज

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि संबंधित संपत्तियां रानू साहू के कलेक्टर बनने से पहले खरीदी गई थीं, इसलिए उन्हें जब्त करना अनुचित है। साथ ही यह भी कहा गया कि उनका नाम FIR में शामिल नहीं है।

लेकिन कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ये आधार कार्रवाई को निरस्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केवल अवैध संपत्ति ही नहीं, बल्कि उसके बराबर मूल्य की अन्य संपत्तियां भी अटैच की जा सकती हैं।

यानी यदि अवैध कमाई का सीधा पता नहीं चलता, तो एजेंसियां समान मूल्य की संपत्तियों को भी जब्त कर सकती हैं—भले ही वे पहले वैध रूप से खरीदी गई हों।

परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी पर्याप्त

डिवीजन बेंच ने यह भी माना कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सीधे सबूत मिलना कठिन होता है। ऐसे में वित्तीय लेन-देन, संपत्ति खरीद की टाइमलाइन और वैध आय के अभाव जैसे परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी अपराध से संबंध स्थापित किया जा सकता है।

जांच एजेंसियों को मिला बड़ा संबल

इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों, खासकर ED को कानूनी रूप से और मजबूती मिली है। कोर्ट के इस रुख से साफ संकेत है कि आर्थिक अपराधों में सख्ती बरती जाएगी और तकनीकी आधार पर राहत मिलना आसान नहीं होगा।

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