निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद वोटिंग हुई, जिसमें सरकार को करारा झटका लगा। यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया।
वोटिंग में क्या हुआ?
लोकसभा में कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। इनमें से 298 सदस्यों ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।
संविधान संशोधन बिल को पारित कराने के लिए 352 वोटों (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता थी, जो सरकार हासिल नहीं कर पाई। इसी कारण यह विधेयक 54 वोटों से गिर गया।
क्या था बिल में प्रावधान?
महिला आरक्षण से जुड़े इस संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में संसद की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव शामिल था। इसके अलावा परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े दो अन्य संशोधन बिल भी चर्चा में थे, जिन्हें सरकार ने वोटिंग के लिए आगे नहीं बढ़ाया।
विपक्ष का हमला
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया।राहुल गांधी ने कहा कि यह संविधान पर हमले को रोकने की जीत है।
प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र और एकता की सफलता बताया।वहीं शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है।
सरकार का रुख
सरकारी पक्ष ने दावा किया था कि यदि यह बिल पास नहीं होता है तो इसके लिए विपक्ष जिम्मेदार होगा। संसदीय बहस के दौरान अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था।
राजनीतिक असर
इस फैसले के बाद संसद में राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। सरकार और विपक्ष दोनों ने इसे अपनी-अपनी वैचारिक जीत और हार के रूप में पेश किया है।फिलहाल यह मामला देश की राजनीति में एक बड़े बहस का विषय बन गया है।











