Ram Mandir Anniversary : भोपाल। अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राजधानी भोपाल के हुजूर क्षेत्र में दीपावली जैसा माहौल नजर आया। स्थानीय विधायक रामेश्वर शर्मा के ‘युवा सदन’ कार्यालय परिसर में अयोध्या के नवनिर्मित मंदिर की एक भव्य और विशाल प्रतिकृति स्थापित की गई है, जिसका विधिवत शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयकारों से गुंजायमान रहा।
प्रतिकृति का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण हिंदू समाज के 500 वर्षों के कठिन संघर्ष और अटूट धैर्य का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके दृढ़ संकल्प से ही करोड़ों देशवासियों का यह सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस गौरवशाली अवसर को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के पुनरुत्थान का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि श्रीराम मंदिर केवल ईंट-पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि यह हमारी एकता, संस्कारों और सनातन परंपरा का जीवंत केंद्र है। उन्होंने विधायक रामेश्वर शर्मा की इस पहल को सराहते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
युवा सदन परिसर में निर्मित यह भव्य प्रतिकृति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि यह प्रतिकृति आगामी तीन दिनों तक आम जनता के दर्शन के लिए उपलब्ध रहेगी। आयोजन के पहले ही दिन बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु अपने परिजनों के साथ यहाँ पहुँचे। लोग न केवल मंदिर के स्वरूप को निहार रहे हैं, बल्कि इस भव्य संरचना के साथ सेल्फी लेकर उत्सव का आनंद भी साझा कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और दर्शनार्थियों की सुविधा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी से सजी मंदिर की यह प्रतिकृति साक्षात अयोध्या का अनुभव करा रही है। स्थानीय नागरिकों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में महिलाएँ व बच्चे भी भक्तिमय माहौल में शामिल होने पहुँच रहे हैं।
अंत में विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की वर्षगांठ मनाना हर रामभक्त का सौभाग्य है। उन्होंने भोपाल की जनता से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर प्रभु के इस भव्य स्वरूप के दर्शन करें और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें।











