रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के आदिवासी बहुल तमनार क्षेत्र में JPC कोल माइन (गारे–पेलमा सेक्टर-1) को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को यह प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। रविवार को बिलासपुर पुलिस रेंज के आईजी और कमिश्नर प्रदर्शनकारियों से बातचीत करेंगे, जबकि तमनार थाना परिसर में एसपी दिव्यांग पटेल ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पुलिसकर्मी घायल
शनिवार को तमनार थाना क्षेत्र के ग्राम लिबरा स्थित CHP चौक पर प्रदर्शन उस वक्त उग्र हो गया, जब भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान SDOP और TI समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर भीड़ ने पुलिस और सरकारी वाहनों में आगजनी भी की, जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया।
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14 गांवों के ग्रामीण धरने पर
सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले 14 गांवों के ग्रामीण लंबे समय से धरने पर बैठे हैं। शनिवार सुबह प्रशासन ने लगभग 300 लोगों की भीड़ को समझाकर हटाया, लेकिन दोपहर तक यह संख्या बढ़कर करीब 1000 हो गई। स्थिति संभालने के तमाम प्रयासों के बावजूद भीड़ बेकाबू हो गई।
ग्रामीणों का विरोध क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि धौराभाठा गांव में प्रस्तावित जिंदल कंपनी की कोल माइन परियोजना से जंगल, जल और जमीन को भारी नुकसान होगा। उनका आरोप है कि 8 दिसंबर को जनसुनवाई चुपचाप किसी अन्य स्थान पर कर दी गई, जो नियमों के खिलाफ है।
प्रशासन की पहल, बातचीत से समाधान की कोशिश
प्रशासन का कहना है कि शांति बहाल करने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।









