Thalapathy Vijay TVK : चेन्नई/नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति इस समय अपने सबसे दिलचस्प और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। थलपति विजय की पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से महज 10 कदम दूर रह जाने के कारण सत्ता की राह चुनौतीपूर्ण हो गई है। गुरुवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने टीवीके प्रमुख विजय को दूसरी बार बैरंग लौटा दिया और स्पष्ट किया कि शपथ ग्रहण से पहले उन्हें 118 विधायकों के समर्थन का हस्ताक्षरित पत्र सौंपना होगा।
राज्यपाल का सख्त रुख और संवैधानिक बहस राज्यपाल का तर्क है कि वह सरकार बनाने से पहले राज्य में स्थायी बहुमत सुनिश्चित करना चाहते हैं ताकि भविष्य में कोई अस्थिरता न हो। हालांकि, इस फैसले ने एक नई संवैधानिक बहस को जन्म दे दिया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने राज्यपाल के इस रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के ‘एस.आर. बोम्मई’ फैसले के अनुसार, बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल (Floor Test) पर होना चाहिए।
जोड़-तोड़ की राजनीति और ‘पुडुचेरी कैंप’ सत्ता की इस बिसात में एआईएडीएमके (AIADMK) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। नेता प्रतिपक्ष ई. पलानीसामी (EPS) ने भी राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। वहीं, खबरें हैं कि एआईएडीएमके के कुछ विधायक टीवीके के साथ जाने की संभावना तलाश रहे हैं, बशर्ते उन्हें कैबिनेट में हिस्सेदारी और उपमुख्यमंत्री पद मिले। वर्तमान में एआईएडीएमके विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें पुडुचेरी के एक कैंप में रखा गया है, जिसकी कमान एलजेके महासचिव सुरेश और वरिष्ठ नेता संभाल रहे हैं।
वीसीके (VCK) बन सकती है किंगमेकर डीमके (DMK) के सहयोगी दल वीसीके के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने हाल ही में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वीसीके जल्द ही थलपति विजय के साथ जाने का फैसला कर सकती है। यदि वीसीके के विधायक विजय को समर्थन देते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा जुटाना आसान हो जाएगा। डीएमके ने भी संकेत दिए हैं कि वे अपने सहयोगियों को फैसला लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ सकते हैं।









