Sunday, September 20, 2026
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CG High Court Divorce Verdict: शादी के तीन महीने बाद शुरू हुआ विवाद, हाई कोर्ट से पति को लगा झटका

Chhattisgarh High Court
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बिलासपुर। Nishaanebaz.com-CG High Court Divorce Verdict: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद और तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है। बिलासपुर स्थित हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल पत्नी द्वारा पति को ‘मोटा’ या ‘सांवला’ कहना कानूनन क्रूरता का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि विवाह विच्छेद (तलाक) जैसी गंभीर कानूनी प्रक्रिया के लिए क्रूरता और परित्याग जैसे आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और प्रामाणिक साक्ष्य होना अनिवार्य है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने पति द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

मामले के विवरण के अनुसार, आकाश और पूजा (परिवर्तित नाम) का विवाह 7 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। पति का आरोप था कि शादी के लगभग तीन महीने बाद ही दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई। पति ने दावा किया कि पत्नी उसके रंग-रूप को लेकर तंज कसती थी, उसे मोटा और सांवला कहकर अपमानित करती थी तथा आए दिन घर छोड़कर जाने की धमकी देती थी। इन तर्कों के आधार पर पति ने जांजगीर-चांपा के परिवार न्यायालय (Family Court) में तलाक के लिए याचिका दायर की थी।

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फैमिली कोर्ट जांजगीर-चांपा ने पूर्व में पति द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए उसकी तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद पति ने परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता पति ने पत्नी पर अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के कई गंभीर आरोप तो लगाए हैं, लेकिन उन्हें सिद्ध करने के लिए कोई ठोस प्रत्यक्ष या दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए।

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डिवीजन बेंच ने 18 सितंबर को मामले पर अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि केवल शारीरिक बनावट या रंग-रूप को लेकर की गई आपसी टिप्पणियों को कानून की नजर में मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) का मुख्य आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना कि बिना पुख्ता सबूतों के केवल मौखिक आरोपों के आधार पर विवाह को समाप्त करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने जांजगीर-चांपा परिवार न्यायालय के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका पूरी तरह से निरस्त कर दी।

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