Singrauli Lokayukta Raid: सिंगरौली | मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग के एक वर्ग-2 अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। बैढ़न स्थित विभागीय कार्यालय में हुई इस कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया।
Singrauli Lokayukta Raid: जानकारी के अनुसार लोकायुक्त टीम ने मुन्नालाल वर्मा नामक अधिकारी को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। आरोप है कि अधिकारी ने एक कर्मचारी के वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) संबंधी प्रकरण को आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उससे कुल 7 हजार रुपये मांगे गए थे।
वेतन वृद्धि के बदले मांगी गई रिश्वत
Singrauli Lokayukta Raid:देवसर परियोजना में पदस्थ कर्मचारी श्रवण तिवारी को अपने वेतन वृद्धि संबंधी प्रकरण का निराकरण कराना था। आरोप है कि विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के लिए उससे रिश्वत मांगी गई। परेशान होकर उसने 25 मई को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत सही मिलने पर बिछाया गया जाल
Singrauli Lokayukta Raid:लोकायुक्त ने शिकायत का सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत 29 मई को लोकायुक्त की टीम बैढ़न स्थित कार्यालय पहुंची और जैसे ही रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया।
Singrauli Lokayukta Raid:कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से रिश्वत की राशि, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए हैं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
दूसरे कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
Singrauli Lokayukta Raid:मामले में विभाग से जुड़े संजय पांडेय का नाम भी सामने आया है। शिकायतकर्ता ने उन पर भी रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। हालांकि कार्रवाई के समय उनके भोपाल में होने की जानकारी मिली, इसलिए वे लोकायुक्त टीम की पकड़ में नहीं आ सके। अब जांच एजेंसी उनकी भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
विभाग में मचा हड़कंप
Singrauli Lokayukta Raid:सरकारी कार्यालय में अधिकारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल है। इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Singrauli Lokayukta Raid:लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।









