Jain Sadhvi Harsha: हरदा (मध्य प्रदेश)। देश भर में जैन धर्म के निस्वार्थ और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले जैन संत-साध्वियों की पैदल विहार सुरक्षा को लेकर जैन समाज मुखर हो गया है। मध्य प्रदेश के हरदा जिला मुख्यालय पर सकल जैन समाज के बैनर तले समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और महिला संगठनों ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ (National Saint Protection Policy) बनाए जाने सहित पांच सूत्रीय विधिक मांगों को लेकर देश के महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री के नाम एक संयुक्त ज्ञापन हरदा संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को सौंपा है। समाज का मानना है कि पूर्णतः अपरिग्रह और अहिंसा का पालन करने वाले जैन संतों की सुरक्षा के लिए अब राष्ट्रीय स्तर पर कड़े विधिक और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय लागू करने का समय आ गया है।
पैदल विहार करने वाले निहत्थे संतों की सुरक्षा आज गंभीर चिंता का विषय: सुरेंद्र जैन
ज्ञापन सौंपने के दौरान हरदा जैन समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने संतों की व्यावहारिक कठिनाइयों और सड़क पर मंडराते खतरों को रेखांकित किया।
अध्यक्ष का वक्तव्य: “अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने वाले हमारे जैन संत और साध्वियां पूरी तरह से निहत्थे और पैदल विहार (March) करते हैं। वे किसी भी प्रकार के आधुनिक वाहन या सुरक्षा दल का उपयोग नहीं करते। ऐसे में राष्ट्रीय और प्रादेशिक राजमार्गों पर तेज गति और घोर लापरवाही से चलने वाले भारी वाहनों के कारण उनकी जान को लगातार गंभीर खतरा बना रहता है। पैदल विहार करने वाले इन निस्वार्थ संतों की सुरक्षा आज समूचे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।”
रीवा सड़क हादसे का विशेष उल्लेख; दोषियों पर कठोर विधिक कार्रवाई की मांग
संयुक्त कलेक्टर को सौंपे गए पांच सूत्रीय मांगपत्र में जैन समाज ने हाल ही में मध्य प्रदेश के रीवा जिले में हुई एक अत्यंत हृदयविदारक सड़क दुर्घटना का विधिक संदर्भ दिया है। इस हादसे में पैदल विहार कर रहीं जैन महिला संतों (साध्वियों) की दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। हरदा जैन समाज ने इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए मांग की है कि रीवा हादसे के जिम्मेदार लापरवाह वाहन चालकों और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा और पांच सूत्रीय मांगों का खाका
प्रशासनिक स्तर पर सौंपे गए इस ज्ञापन में सकल जैन समाज की ओर से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है:
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राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति: केंद्र सरकार द्वारा विधिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर एक समर्पित ‘संत सुरक्षा नीति’ का खाका तैयार किया जाए।
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विशेष सुरक्षा व्यवस्था: जैन संतों के पारंपरिक पैदल विहार मार्गों (Routes) पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा विशेष गश्त व सुरक्षा घेरा सुनिश्चित किया जाए।
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संकेतक और गति सीमा: जिन राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्गों से जैन संतों का विहार गुजरता है, वहां अनिवार्य रूप से ‘संत विहार गति नियंत्रक संकेतक’ (Signboards) लगाए जाएं।
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दुर्घटनाओं पर त्वरित एफआईआर: संतों के विहार के दौरान लापरवाही बरतने वाले व्यावसायिक और निजी वाहन चालकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज हो।
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स्थानीय प्रशासनिक कोआर्डिनेशन: चातुर्मास और विहार के समय स्थानीय जिला प्रशासन समाज के साथ मिलकर रूट मैप की अग्रिम सुरक्षा समीक्षा करे।
इस दौरान सामाजिक महिला कार्यकर्ता रीतू जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष और युवा उपस्थित रहे, जिन्होंने एक सुर में देश के संतों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए प्रशासनिक हस्तक्षेप की पुरजोर वकालत की।









