शाजापुर/गुलाना। शाजापुर जिले के गुलाना क्षेत्र में बियर बनाने के बाद बचे अपशिष्ट (राप) के परिवहन को लेकर बुधवार को अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो गई। तहसीलदार रितेश जोशी ने बियर दाने (मलबा) से भरे एक ट्रक और एक पिकअप वाहन को पकड़कर सलसलाई थाने खड़ा करवाया, लेकिन 5 घंटे बीत जाने और 8 विभागों के अधिकारियों के जुटने के बाद भी यह तय नहीं हो सका कि आखिर कार्रवाई किस कानून के तहत की जाए।
आधी रात तक चला अधिकारियों का जमावड़ा मामले की गंभीरता को देखते हुए शाजापुर से खाद्य विभाग (Food Inspector), उप संचालक वेटनरी, जिला आपूर्ति अधिकारी, कृषि विभाग सहित करीब 7 से 8 विभागों के अधिकारी मौके पर पहुँचे। रात्रि 10 बजे तक मंथन चलता रहा, लेकिन अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर असमंजस बना रहा कि ‘बियर राप’ का परिवहन अपराध की किस श्रेणी में आता है। अंततः तहसीलदार रितेश जोशी ने कहा कि मामले की स्पष्टता अब गुरुवार सुबह ही हो पाएगी।
दूध बढ़ाने के लिए ‘बियर वेस्ट’ का खतरनाक खेल दरअसल, पशुपालकों द्वारा दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए गाय-भैंसों को बियर का मलबा (राप) खिलाने का नया चलन सामने आया है। बताया जा रहा है कि इसे खिलाने से पशु 3 से 4 लीटर तक अधिक दूध देने लगते हैं। क्षेत्र के कई किसान इसका उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को इंजेक्शन, यूरिया या डिटर्जेंट देना पहले से ही सेहत के लिए घातक माना जाता रहा है, लेकिन बियर के मलबे का पशुओं और मानव स्वास्थ्य पर क्या असर होगा, इस पर अब तक कोई ठोस शोध सामने नहीं आया है।
अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ता संदेह प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि यदि यह पशु आहार के रूप में अवैध है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? विभागों के बीच समन्वय की कमी और कानूनी स्पष्टता न होने के कारण पकड़े गए वाहनों पर फिलहाल कोई केस दर्ज नहीं हो सका है। गुरुवार सुबह होने वाली जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मामला खाद्य अपमिश्रण (Food Adulteration) के दायरे में आता है या पशु क्रूरता के।











