Russia-Ukraine War : ट्रंप के अल्टीमेटम से कांपा यूक्रेन, पुतिन खुश! जानें पीस प्लान पर क्या बोले जेलेंस्की

Rahul Goshwami
पीस प्लान पर ट्रंप ने दिया अल्टीमेटम

Russia-Ukraine Collision/नई दिल्ली : रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबे और थकाऊ दौर में अचानक एक नया कूटनीतिक धमाका हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित 28-प्वाइंट पीस प्लान ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच पहले से भड़क रहे तनाव को और भड़का दिया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने राष्ट्र के नाम संबोधन में साफ संकेत दिया कि आने वाले दिनों में कीव को “बहुत बड़ा और बहुत दर्दनाक” फैसला लेना पड़ सकता है—एक ऐसा फैसला जो या तो उसकी संप्रभुता बचाएगा, या उसे अपने सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका से दूर कर सकता है।

पुतिन ने कहा—“यही चाहिए था”
ट्रंप की योजना पर रूस का रुख किसी कूटनीतिक झटके से कम नहीं। पुतिन ने इस अमेरिकी प्रस्ताव का गर्मजोशी भरा, पर रणनीतिक रूप से सधा हुआ स्वागत किया। योजना में रूस की कई पुरानी मांगों—जैसे विवादित इलाकों पर नियंत्रण, यूक्रेनी सेना में कटौती और NATO की राह रोकना—को शामिल किया गया है।

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Russia-Ukraine Collision पुतिन ने कहा कि यह प्रस्ताव “अंतिम शांति समझौते का आधार” बन सकता है, लेकिन तीखी टिप्पणी भी जोड़ी—“यूक्रेन मानने को तैयार ही नहीं।” रूस ने साफ कहा कि वॉशिंगटन अब तक कीव की सहमति तक नहीं पहुंच पाया है, और यही इस खिंचाव का सबसे बड़ा कारण है।

यूक्रेन के सामने दो ही रास्ते
जेलेंस्की ने अपने संदेश में प्रस्ताव को नकारा तो नहीं, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता सौदे में नहीं डाल सकता। उनका तंज बेहद तीखा था—“यूक्रेन या तो अपनी गरिमा खो देगा… या एक प्रमुख साझेदार खोने का जोखिम उठाएगा।”

उन्हें उम्मीद है कि ट्रंप और यूरोपीय सहयोगियों के साथ बातचीत आगे नए रास्ते खोलेगी, लेकिन दबाव अब चरम पर है। कीव में राजनीतिक उथल-पुथल अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

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ट्रंप का अल्टीमेटम—माना तो ठीक, नहीं तो…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन पर कड़ा अल्टीमेटम लगा दिया है।
उनका संदेश था—“या तो योजना स्वीकार करो… या फिर युद्ध जारी रखने के लिए तैयार रहो।”ट्रंप ने गुरुवार तक जवाब की समयसीमा दी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समय बढ़ाने की गुंजाइश है, पर प्लान की शर्तें बदलने की नहीं।

यूरोप ने दिया भरोसा, पर टकराव की राह और तेज
जेलेंस्की ने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं से बात की, जिन्होंने उनका हौसला बढ़ाया और यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा का वादा किया।यूरोपीय नेताओं का संदेश साफ था—“यूक्रेन का फैसला यूक्रेन करेगा।”

लेकिन मौजूदा हालात में यह संघर्ष सिर्फ युद्ध के मैदान पर नहीं, बल्कि कूटनीति की मेज पर भी तेज हो चुका है। रूस की स्वीकृति और यूक्रेन की हिचकिचाहट ने ट्रंप प्रस्ताव को एक नए भू-राजनीतिक तूफान में बदल दिया है।

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