Nakti Village Dispute: नकटी गांव विवाद पर भड़के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, दी खुली चुनौती— “घड़ियाली आंसू छोड़ें, लिखित में दें कि विधायक कॉलोनी में प्लाट नहीं लेंगे”

Nakti Village Dispute: रायपुर (एडिटरजी न्यूज डेस्क): राजधानी रायपुर के नकटी गांव में प्रस्तावित हाई-प्रोफाइल ‘विधायक कॉलोनी’ के निर्माण और भूमि आवंटन को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में भूचाल आ गया है। इस विषय पर चल रहे तीखे विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक घमासान के बीच प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस की सहानुभूति को पूरी तरह ढोंग करार देते हुए चुनौती दी है कि अगर कांग्रेस नेताओं को नकटी के प्रभावित ग्रामीणों और गरीबों से इतनी ही सच्ची हमदर्दी है, तो उन्हें सबसे पहले खुद को आवंटित होने वाली कीमती जमीन को लात मार देनी चाहिए।

“कांग्रेस के सभी विधायक लिखित में दें घोषणा पत्र”

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दोटूक लहजे में कहा, ‘केवल मीडिया के सामने राजनीतिक बयानबाजी करने और घड़ियाली आंसू बहाने से इन प्रभावित ग्रामीणों का कोई भला नहीं होने वाला है। अगर कांग्रेस के इरादे साफ हैं, तो उनके सभी विधायकों को सामूहिक रूप से विधानसभा और शासन को लिखित रूप में यह आधिकारिक घोषणा करनी चाहिए कि वे नकटी गांव की इस विवादित जमीन पर अपना भूखंड (अलॉटमेंट) स्वीकार नहीं करेंगे।’

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“कांग्रेस शासनकाल में ही आरक्षित हुई थी यह जमीन”

मामले की इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए मंत्री जायसवाल ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि इस विधायक कॉलोनी के लिए भूमि आरक्षित करने और आवंटन की पूरी रूपरेखा पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों से इस भूमि को लेकर पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और कार्रवाई चल रही थी, लेकिन तब कांग्रेस का कोई भी नेता ग्रामीणों के पक्ष में खड़ा होने नहीं आया। अब जब नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ रही है, तो कांग्रेस नेता केवल राजनीतिक माइलेज और चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से इस संवेदनशील मुद्दे को जानबूझकर हवा दे रहे हैं। यह बिल्कुल “सांप निकल जाने के बाद लाठी पीटने” जैसी खोखली राजनीति है।

चिंतन शिविर और डिजिटल सशक्तिकरण से बदलेगा छत्तीसगढ़

कांग्रेस पर हमले के बाद मंत्री जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आगामी चिंतन शिविर और संगठनात्मक बदलावों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा के चिंतन शिविर जैसे वैचारिक आयोजनों से जनहित की कल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने का रोडमैप तैयार होता है, जिससे सुशासन (Good Governance) को मजबूती मिलती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि समय की मांग को देखते हुए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक डिजिटल रूप से पूरी तरह सशक्त कर रही है, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी भ्रष्टाचार के कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा सके।

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