ED’s massive raid : रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर समेत देशभर के 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप मचा दिया है। यह कार्रवाई जय कॉर्प लिमिटेड के निदेशक आनंद जयकुमार जैन और उनसे जुड़े सहयोगियों के खिलाफ दर्ज 2,434 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में की गई है। रायपुर के कचना स्थित ‘आनंदम सिटी’ में बिल्डर राकेश सरावगी के कार्यालय पर भी ईडी की टीम ने सुबह तड़के छापा मारा।
ED’s massive raid : हाई-प्रोफाइल मामला: ड्रीम-11 कनेक्शन यह मामला इसलिए भी हाई-प्रोफाइल हो गया है क्योंकि मुख्य आरोपी आनंद जैन मशहूर गेमिंग कंपनी ड्रीम-11 के को-फाउंडर हर्ष जैन के पिता हैं। सीबीआई (CBI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर आनंद जैन, पराग पारेख और उनकी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसके आधार पर अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों को जोड़ रही है।
ED’s massive raid : रियल एस्टेट के नाम पर जुटाए अरबों रुपये जांच एजेंसियों के अनुसार, साल 2006 से 2008 के बीच आरोपियों ने मुंबई और अन्य शहरों में रियल एस्टेट डेवलपमेंट के नाम पर निवेशकों से लगभग 2,434 करोड़ रुपये जुटाए थे। आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि को घोषित उद्देश्यों के बजाय अवैध रूप से मॉरिशस और जर्सी (Channel Islands) जैसे देशों में स्थित विदेशी शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।
ED’s massive raid : बैंक कर्ज का दुरुपयोग और फ्यूचर ट्रेडिंग जांच में यह भी सामने आया है कि नवी मुंबई SEZ के नाम पर बैंकों से 3,252 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। इस पैसे का इस्तेमाल रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स की फ्यूचर ट्रेडिंग और ऑफशोर निवेश में करने का संदेह है। रायपुर में बिल्डर राकेश सरावगी के ठिकानों पर पहुंची 5 अधिकारियों की टीम संदिग्ध ट्रांजेक्शन और कर्मचारियों से पूछताछ के जरिए इस मनी ट्रेल की कड़ियों को रायपुर से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
ED’s massive raid : छत्तीसगढ़ में लगातार एक्शन रायपुर में केवल रियल एस्टेट ही नहीं, बल्कि कृषि कारोबारियों पर भी ईडी का शिकंजा कसा है। शंकर नगर में खाद कारोबारी विनय गर्ग और लॉ विस्टा कॉलोनी में दो अन्य कारोबारियों के ठिकानों पर भी जांच जारी है। ईडी को शक है कि छत्तीसगढ़ के इन कारोबारियों के तार मुंबई के बड़े मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में संपत्तियों की कुर्की और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।













