डॉ. राघवाचार्य महाराज रीवा जिले के सेमरिया थाना क्षेत्र के चकदेही गांव में आयोजित एक शिव मंदिर में विराजमान शिव परिवार की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सनातन धर्म और मूर्ति पूजा के महत्व पर विस्तार से बात की।
सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का महत्व
अपने संबोधन में राघवाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में मूर्ति पूजा एक महत्वपूर्ण परंपरा है, लेकिन इसका पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रों और शास्त्र सम्मत विधि से की जाए।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित विधि से की गई प्राण प्रतिष्ठा से ही भक्तों को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और मंदिर में स्थापित देव प्रतिमा में दिव्यता का संचार होता है।
मूर्ति पूजा का विरोध करने वालों पर भी टिप्पणी
राघवाचार्य महाराज ने बिना किसी का नाम लिए मूर्ति पूजा का विरोध करने वालों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हर धर्म और पंथ में किसी न किसी रूप में ईश्वर की आराधना के लिए एक दिशा या प्रतीक का उपयोग किया जाता है।
उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है, जिसे सनातन धर्म में मूर्ति पूजा के रूप में स्वीकार किया गया है।
Read More : M.P News : सिंगरौली में पत्रकार पर गौ-तस्करी का केस, पत्नी ने लगाए साजिश के आरोप
रामभद्राचार्य पर दिए बयान पर दी सफाई
गौरतलब है कि हाल ही में जगतगुरु रामभद्राचार्य को लेकर राघवाचार्य महाराज की टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने कहा था कि शास्त्रों के अनुसार किसी अंगहीन व्यक्ति को संप्रदाय का आचार्य बनने का अधिकार नहीं होता, साथ ही उन्होंने रामभद्राचार्य पर ज्ञान के अहंकार का आरोप भी लगाया था।
अब इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए राघवाचार्य महाराज ने कहा कि उनकी वह टिप्पणी उस समय की परिस्थितियों का परिणाम थी।
संत समाज में जारी बहस
जगतगुरु पदवी को लेकर संत समाज में विचारों का मतभेद देखने को मिल रहा है। हालांकि राघवाचार्य महाराज के ताजा बयान के बाद इस विवाद को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।रीवा में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुए।