Political Controversy Teacher Suspension : भोपाल: शिवपुरी में प्रधानमंत्री की मिमिक्री करने के आरोप में एक शिक्षक को निलंबित किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस कार्रवाई को ‘अत्यंत चिंताजनक’ बताते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब लोकतंत्र में सवाल पूछना और अपनी बात रखना अपराध की श्रेणी में आता है?
‘सरकार अपनी प्राथमिकताएं बदले’ नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस समय प्रदेश और देश की जनता महंगाई, गैस की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल-डीजल के बोझ तले दबी हुई है। सरकार को जनता की इन समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए, लेकिन इसके बजाय एक शिक्षक को निलंबित करना सरकार की गलत प्राथमिकताओं को दर्शाता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज प्रदेश के युवाओं और कर्मचारियों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, क्या वह एक ‘बड़ी मिमिक्री’ नहीं है?
‘दंड देना लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है’ उमंग सिंघार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि असहमति या सवाल उठाने वालों को सजा देना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जनता की पीड़ा और उनके सवालों को दबाकर कभी समस्याओं का समाधान नहीं होता। यदि सरकार जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें दबाने की नीति अपनाती है, तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि आवाज़ दबाने की तानाशाही प्रवृत्ति बन जाती है।
सरकार से मांगा समाधान सिंघार ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि उसे दंड देने के बजाय जनता की समस्याओं का जवाब देना चाहिए। लोकतंत्र में जनता को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है और उस अधिकार का सम्मान करना ही सरकार का मुख्य कर्तव्य है। फिलहाल इस निलंबन के बाद विपक्ष पूरी तरह से हमलावर है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है।











