Sunday, August 23, 2026
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Skin Rashes Alert: स्किन पर बार-बार लाल चकत्ते दिखना सामान्य एलर्जी नहीं, हो सकता है ब्लड कैंसर का शुरुआती संकेत: डॉक्टर

Skin Rashes Alert: नई दिल्ली। बदलते मौसम और खानपान के इस दौर में त्वचा पर रैशेज, लाल चकत्ते या छोटे-छोटे दाने उभरना बेहद आम बात मानी जाती है। अधिकांश लोग इसे सामान्य स्किन एलर्जी, डर्मेटाइटिस या किसी कीड़े के काटने का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटी-एलर्जिक क्रीम लगा लेते हैं। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्ट्स (कैंसर विशेषज्ञों) ने एक बेहद संवेदनशील चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर ये लाल-बैंगनी निशान त्वचा पर लंबे समय तक बने रहें और सामान्य इलाज के बाद भी ठीक न हों, तो इन्हें हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है। कई मामलों में यह गंभीर रक्त विकार या ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) का शुरुआती अलार्म हो सकता है।

बोन मैरो में डीएनए म्यूटेशन से होती है ब्लड कैंसर की शुरुआत

‘यूके ब्लड कैंसर संस्थान’ द्वारा जारी एक वैश्विक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, ब्लड कैंसर की उत्पत्ति मानव हड्डियों के भीतर मौजूद ‘बोन मैरो’ (अस्थि मज्जा) में होती है। बोन मैरो हमारे शरीर का वह मुख्य कारखाना है जहां लाल रक्त कोशिकाएं (RBC), सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC) और प्लेटलेट्स का निर्माण होता है।

जब किसी कारणवश इन खून बनाने वाली सेल्स के डीएनए (DNA) में संरचनात्मक बदलाव या म्यूटेशन होने लगते हैं, तो शरीर में असामान्य और अनियंत्रित व्हाइट ब्लड सेल्स तेजी से विकसित होने लगती हैं। ये कैंसरग्रस्त कोशिकाएं धीरे-धीरे बोन मैरो में जमा होकर स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को ठप कर देती हैं, जिससे पूरा इम्यून सिस्टम और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने लगती है।

त्वचा पर दिखने वाले ये निशान हैं बेहद खास; समझिए ‘पेटीकीए’ का विज्ञान

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड कैंसर के लक्षण हर मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुसार अलग हो सकते हैं, लेकिन त्वचा पर दिखाई देने वाले कुछ विशेष बदलाव इसके सबसे प्राथमिक और पुख्ता संकेत होते हैं:

  • पेटीकीए (Petechiae): त्वचा के नीचे सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Capillaries) के फटने के कारण शरीर पर सुई की नोंक जैसे छोटे-छोटे लाल या गहरे लाल रंग के बिंदु उभर आते हैं, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में ‘पेटीकीए’ कहा जाता है।
  • बैंगनी पैच और नीले निशान: कई बार बिना किसी चोट या रगड़ के शरीर के विभिन्न हिस्सों, जैसे हाथ, पैर या पीठ पर बड़े लाल-बैंगनी रंग के पैच (Purpura) या नीले रंग के निशान (Bruises) उभर आते हैं।
  • दबाव टेस्ट: इन निशानों की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यदि आप इन पर उंगली से दबाव (प्रेशर) डालेंगे, तब भी इनका रंग फीका, सफेद या हल्का नहीं पड़ता, बल्कि यह वैसा ही गहरा बना रहता है।

प्लेटलेट्स की भारी कमी बनती है चकत्तों का मुख्य कारण

सैल्यूटरी और हेमेटोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, जब ल्यूकेमिया के कारण बोन मैरो में स्वस्थ कोशिकाओं का उत्पादन गिर जाता है, तो शरीर में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या में भारी गिरावट (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) आती है। चूंकि प्लेटलेट्स का मुख्य कार्य शरीर में कहीं भी ब्लीडिंग होने पर खून का थक्का (Clot) बनाना होता है, इसलिए इसकी कमी होते ही त्वचा के ठीक नीचे मौजूद बारीक नसें अपने आप लीक करने लगती हैं और खून जमा होने से त्वचा पर ये डरावने निशान दिखाई देने लगते हैं। इसके अलावा, मरीजों में बार-बार तेज बुखार आना, बिना किसी मेहनत के अत्यधिक थकान और कमजोरी रहना, सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलना, अचानक बिना वजह वजन का तेजी से घटना, रात में सोते समय अत्यधिक पसीना आना और गर्दन, बगल या जांघों में दर्द रहित गांठें (लिम्फ नोड्स में सूजन) महसूस होना भी इसके अन्य गंभीर लक्षण हैं।

कब और कौन सी जांच कराना है बेहद जरूरी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सहित दुनिया भर में ब्लड कैंसर के मामले आखिरी स्टेज में सिर्फ इसलिए पहुंचते हैं क्योंकि लोग शुरुआती महीनों में इसे सामान्य कमजोरी या इंफेक्शन समझकर टालते रहते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यदि त्वचा पर ऐसे निशान बार-बार दिख रहे हैं, तो तुरंत किसी योग्य फिजिशियन या हेमेटोलॉजिस्ट से संपर्क कर सीबीसी (CBC – Complete Blood Count) टेस्ट कराना चाहिए।

यह एक बेहद साधारण और किफायती ब्लड टेस्ट है, जिसके जरिए शरीर में हीमोग्लोबिन, रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की सटीक संख्या और उनकी संरचना का पता चल जाता है। यदि सीबीसी रिपोर्ट में किसी भी प्रकार का असामान्य उतार-चढ़ाव या विकृति दिखाई देती है, तो डॉक्टर तुरंत बोन मैरो एस्पिरेशन या बायोप्सी जैसी एडवांस जांचों की सलाह देते हैं।

विशेषज्ञों की अंतिम सलाह— घबराएं नहीं, सतर्क रहें: डॉक्टरों ने साफ किया है कि त्वचा पर दिखने वाला हर लाल चकत्ता या दाना कैंसर नहीं होता है, यह सामान्य एक्जिमा, सोरायसिस या फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। लेकिन यदि इसके साथ लगातार त्वचा में खुजली बनी रहे या शरीर में उपरोक्त अन्य लक्षण दिखें, तो आत्म-चिकित्सा (Self-Medication) करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में समय पर की गई जांच और शुरुआती स्टेज में सही इलाज से ब्लड कैंसर को पूरी तरह ठीक करने की संभावना (सक्सेस रेट) अब काफी बेहतर हो चुकी है।

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