Chhattisgarh High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभाग से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि जब अनुकंपा नियुक्ति नीति में साफ प्रावधान है, तो कर्मचारी की मृत्यु के एक महीने के भीतर उसके आश्रित को आवेदन फॉर्म क्यों नहीं दिया गया। हाई कोर्ट ने विभाग को एक सप्ताह के भीतर जवाब और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।
Chhattisgarh High Court: यह मामला न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ में सुनवाई के लिए आया। याचिकाकर्ता विनोद कुमार डोमर उर्फ विनोद कुमार मांझरे ने बताया कि उनके पिता शासकीय सेवा में थे और नौकरी के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि यह कर्मचारी की मौत के तीन महीने के भीतर जमा नहीं किया गया।
Chhattisgarh High Court: याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने अदालत को बताया कि 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के अनुसार, किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि वह एक महीने के भीतर उसके आश्रित परिवार को आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराए। यदि विभाग ने यह जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आवेदन में हुई देरी का दोष आश्रित पर नहीं डाला जा सकता।
Chhattisgarh High Court: सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि विभाग की ओर से दाखिल जवाब में यह नहीं बताया गया कि मृतक कर्मचारी के परिवार को समय पर आवेदन फॉर्म दिया गया था या नहीं। इस पर अदालत ने विभाग से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अगले से अगले सप्ताह होगी।







