Neemuch Municipality Controversy : नीमच। नगर पालिका नीमच में नियमों को ताक पर रखकर एक कर्मचारी को संरक्षण देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी टेकचंद बुनकर का स्थानांतरण जून 2025 में शाजापुर किया गया था, लेकिन स्टे की अवधि खत्म होने के 10 महीने बाद भी कर्मचारी नीमच में ही जमा हुआ है। इस मामले में नगर पालिका प्रशासन और विशेषकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।
अदालती राहत की सीमा हुई समाप्त जानकारी के अनुसार, जून 2025 में जारी स्थानांतरण आदेश के विरुद्ध कर्मचारी ने माननीय हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका (Writ Petition No. 23694 of 2025) लगाई थी। न्यायालय ने 26 जून 2025 को अंतरिम राहत प्रदान की थी, जिसकी विधिक समय-सीमा अगस्त 2025 में ही समाप्त हो चुकी है। विधिक जानकारों के अनुसार, 10 महीनों से बिना किसी प्रभावी स्टे के कर्मचारी का नीमच में कार्य करना प्रशासनिक मिलीभगत का संकेत है।
वित्तीय अनियमितता और सीएमओ का पल्ला झाड़ना इस पूरे प्रकरण में मुख्य नगर पालिका अधिकारी दुर्गा बामनिया का पक्ष चौंकाने वाला है। उनका यह कहना कि “मामला उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है”, भ्रामक प्रतीत होता है क्योंकि कार्यालय प्रमुख होने के नाते आदेशों का पालन कराना उन्हीं की जिम्मेदारी है। नियमों के विरुद्ध कर्मचारी को पद पर बनाए रखना और राजकीय कोष से वेतन का भुगतान करना एक गंभीर वित्तीय अनियमितता है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग मामला उजागर होने के बाद अब प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। मांग की गई है कि टेकचंद बुनकर को तत्काल कार्यमुक्त (Relieve) कर शाजापुर भेजा जाए। साथ ही, स्टे अवधि समाप्त होने के बाद से अब तक किए गए ‘अवैध’ वेतन भुगतान की रिकवरी संबंधित अधिकारियों से की जाए और नियमों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।









